अर्थव्यवस्था संघर्ष नहीं समन्वय का विषय, भारतीय दर्शन में समन्वय का समग्र दृष्टिकोण विद्यमान : मंत्री परमार

WhatsApp Channel Join Now
अर्थव्यवस्था संघर्ष नहीं समन्वय का विषय, भारतीय दर्शन में समन्वय का समग्र दृष्टिकोण विद्यमान : मंत्री परमार


दो दिवसीय मप्र आर्थिक परिषद के 35वें राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय सेमिनार का हुआ शुभारम्भ

भोपाल, 20 फ़रवरी (हि.स.)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि अर्थव्यवस्था संघर्ष नहीं समन्वय का विषय है। भारत के दर्शन में समन्वय का समग्र दृष्टिकोण रहा है। भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान का स्वर्णिम अतीत रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था को विश्वमंच पर अग्रणी भूमिका में स्थापित करने के लिए, भारतीय दृष्टिकोण से समृद्ध अर्थव्यवस्था पर समग्र विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार शुक्रवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल एवं प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय हमीदिया महाविद्यालय भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मप्र आर्थिक परिषद के 35वें राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारम्भ कर, भारतीय दृष्टि से समृद्ध अर्थव्यवस्था के आलोक में अपने विचार साझा कर रहे थे।

मंत्री परमार ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम्, भारत का दृष्टिकोण है। हमारी मान्यता है कि विश्व एक बाजार नहीं बल्कि एक परिवार है। समृद्ध अर्थ-तंत्र के परिप्रेक्ष्य में समन्वित भाव के साथ पर विस्तृत मंथन करने की आवश्यकता है। शुभ-लाभ, हमारा सांस्कृतिक एवं आर्थिक चिंतन है, जो अच्छी पद्धति से धन कमाने का व्यापक संदेश देता है। मंत्री परमार ने ग्रामीण भारत की रसोई और राशन प्रबंधन का उदाहरण साझा करते हुए, ग्रामीणों के आर्थिक प्रबंधन पर प्रकाश डाला। मंत्री परमार ने कहा कि भारत हमेशा से कौशल प्रधान देश रहा है। भारतीय कौशल को वर्तमान आवश्यकता अनुरूप आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए, विश्वमंच पर आगे लाने की आवश्यकता है। मंत्री परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत खाद्यान्न, ऊर्जा सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में सामर्थ्यवान देश बनेगा। इसके लिए हम सभी को अपने परिश्रम और पुरुषार्थ की सहभागिता करनी होगी और विकसित भारत@2047 की संकल्पना की सिद्धि के लिए, अपने पूर्वजों के ज्ञान, संस्कृति एवं दर्शन को संजोकर आगे बढ़ना होगा। हर क्षेत्र-हर विषय में विद्यमान परंपरागत ज्ञान पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में शोध कर, दस्तावेजीकरण करना होगा। इस दो दिवसीय अधिवेशन में, भारत में कौशल विकास एवं मप्र में जनजातीय विकास और भारतीय ज्ञान परम्परा, इन दो महत्वपूर्ण विषयों पर अर्थशास्त्र के शिक्षक, विषयविद और शोधार्थी अपने विचार एवं शोध साझा करेंगे।

इस अवसर पर मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स चेन्नई के निदेशक एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. एन बी भानुमूर्ति, मप्र आर्थिक परिषद की अध्यक्ष प्रो. नीति जैन, परिषद के सचिव प्रो. सखाराम मुजाल्दे, आयोजक सचिव प्रो. शरद तिवारी, प्रो. अनिल शिवानी एवं जर्नल की मुख्य संपादक प्रो. रेखा आचार्य सहित अर्थशास्त्र के विभिन्न प्राध्यापकगण, विविध शिक्षाविद् एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

Share this story