अनूपपुर: प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी और पर्यावरण को बचाने की जरूरत- जिला पंचायत अध्यक्ष
अनूपपुर, 20 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय में प्राकृतिक खेती विषय पर कृषि विभाग द्वारा शनिवार को आयोजित कार्यशाला में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सिंह ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती हमारी परंपरागत कृषि पद्धति है, जो कम लागत में बेहतर उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता एवं पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसके लिए किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से प्राकृतिक खेती के संबंध में जागरूकता बढ़ाने तथा इसके लाभों को गांव-गांव तक पहुंचाने पर बल दिया।
इस दौरान कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवामृत, बीजामृत एवं अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत में कमी लाई जा सकती है तथा मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उत्पादकता एवं जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होते हैं और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषकों ने प्राकृतिक खेती अपनाने के अपने अनुभव साझा करते हुए इसके आर्थिक एवं पर्यावरणीय लाभों की जानकारी दी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी प्रदान की तथा चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को विन्ध्य विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री रामदास पुरी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि कल्याण विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मत्स्य कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग तथा उद्यानिकी विभाग द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। विभिन्न विभागों द्वारा शासन की योजनाओं, कृषि आधारित उत्पादों तथा उन्नत कृषि तकनीकों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों ने प्राकृतिक एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों के संबंध में उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

