मंदसौर कॉलेज में संजा पर्व पर कार्यशाला, छात्राओं ने लोकगीतों से उकेरी मालवा की सांस्कृतिक विरासत

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मंदसौर कॉलेज में संजा पर्व पर कार्यशाला, छात्राओं ने लोकगीतों से उकेरी मालवा की सांस्कृतिक विरासत


मंदसौर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंदसौर के हिंदी विभाग के सृजन क्लब की ओर से शनिवार को लोकपर्व संजा पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों को मालवा की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया। साथ ही नई पीढ़ी को लोकपरंपराओं से जोड़ने और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. टी.के. झाला ने संजा पर्व के सांस्कृतिक महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने भारतीय लोकपरंपराओं को संरक्षित रखने और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने की आवश्यकता बताई।

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. ललिता लोधा ने संजा पर्व की विशेषताओं, इससे जुड़े लोकगीतों और मालवा की सांस्कृतिक पहचान के बारे में जानकारी दी। हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. सीमा जैन ने लोकपर्वों के संरक्षण में विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, संस्कृत के सहायक प्राध्यापक डॉ. अनिल आर्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में संजा पर्व की प्रासंगिकता समझाई। उन्होंने कहा कि लोकपरंपराओं के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

छात्राओं ने लोकगीत गाकर बताई संजा की महत्ता

कार्यशाला में छात्राओं प्रिया कंवर देवड़ा, निर्जला कुंवर, वर्षा चौधरी, श्रद्धा मालवीय, वंदना खुवार, मुस्कान मुंडेल और दीक्षिता राजकुंवर ने संजा पर्व से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। छात्राओं ने लोकगीत प्रस्तुत करने के साथ दीवार पर संजा की आकृति भी बनाई और इसके सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।

वक्ताओं ने कहा कि शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति और लोकाचार से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में संजा जैसे लोकपर्वों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना जरूरी है।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

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