शैक्षणिक गुणवत्ता के सार्थक परिणामों के लिए टीमवर्क भावना से करें कार्यः कलेक्टर

शैक्षणिक गुणवत्ता के सार्थक परिणामों के लिए टीमवर्क भावना से करें कार्यः कलेक्टर
शैक्षणिक गुणवत्ता के सार्थक परिणामों के लिए टीमवर्क भावना से करें कार्यः कलेक्टर


- पहले खुद समझें, फिर दूसरों को समझाएं

विदिशा, 14 मई (हि.स.)। आकांक्षी ग्राम परियोजना एवं प्रोजेक्ट दक्ष के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, डाइट में आयोजित किया गया। मंगलवार को प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम में कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य, जिला पंचायत सीईओ योगेश भरसट तथा प्रभारी डीपीसी व संयुक्त कलेक्टर शशि मिश्रा के अलावा जिला शिक्षा अधिकारी, डाइट प्रिंसिपल तथा समस्त बीईओ, बीआरसी, बीएसी, एमआईएस समन्वयक, जन शिक्षक व एपीसी मौजूद रहे।

कलेक्टर बुद्धेश कुमार वैद्य ने कहा कि जिले में कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों के शैक्षणिक उन्नयन के लिए शिक्षा नीति के अनुरूप किए जाने वाले प्रबंधों के सापेक्षित परिणाम परलिक्षित हो। उन्होंने कहा कि कक्षा पहली से विद्यार्थियों की शैक्षणिक बुनियाद की शुरूआत होती है और यह जितनी मजबूत होगी उतना ही आगे बच्चों का मानसिक व शैक्षणिक ग्रोथ बढेगा। उन्होंने गतवर्ष के शैक्षणिक परिणामों के प्रति खेद प्रकट करते हुए कहा कि शत प्रतिशत बच्चे परीक्षा में शामिल नहीं होना और उत्तीर्ण नहीं होना, यह सब हमारी कार्यप्रणाली को रेखांकित करती है। हमारे द्वारा इस प्रकार की समस्याओं के निदान हेतु क्या रणनीति तय की गई है, उस रणनीति का क्रियान्वयन कैसे कब, किया गया है और आमजनमानस खासकर बच्चांे के अभिभावको को विश्वास में कैसे लिया गया है।

कलेक्टर वैद्य ने उदाहरण देते हुए शासकीय प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन में खासकर अध्यापन कार्यो में कैसे धीरे-धीरे सुप्तय होते जाते हैं, को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिले में बच्चों की बुनियाद मजबूत हो वे शैक्षणिक विधाओं में पीछे न रहें, इसके लिए सत्र शुरू होने से पहले हरेक गुरूजी के साथ-साथ अन्य का दायित्व है कि हर बच्चें की गतिविधियों पर नजर रखे और उन्हें अध्यापन कार्यों की ओर अभिप्रेरित करें। उन्होंने अध्यापन कार्यों को रोचकतापूर्व प्रस्तुतिकरण की ओर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों में रूझान बढे कि वे स्वयं स्कूल की ओर अग्रसर हो। ऐसे समुदाय वर्ग विशेष जो व्यवसाय के कारण इधर-उधर भटकाव करते हैं उनके लिए क्या रणनीति तय की जाए, ताकि जिले के सत्र प्रतिशत विद्यार्थी स्कूलो में उपस्थित हो और परीक्षाओं में सम्मिलित होकर अच्छे परिणामो की सूचियों में विदिशा जिला सम्मिलित हो सकें।

कलेक्टर वैद्य ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा पद्धति को हम कैसे रोचक बनाएं इस ओर लगातार नवाचार हो रहे हैं, जिले की भौगोलिक परिस्थति को ध्यानगत रखते हुए हम इन नवाचारों का क्रियान्वयन करें। उन्होंने कहा कि भ्रमण के दौरान कई स्कूलों में जाकर देखा गया है कि समय पर शिक्षक उपस्थित नहीं हो रहे हैं, इस कारण से बच्चों का भी स्कूल से भटकाव होता है। प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों में अक्षर ज्ञान, मात्रा ज्ञान, भाषा ज्ञान जैसी वेस मजबूत क्षमताएं उन्नत हो, ताकि वे प्रारंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होते है तो अपने आपको कमजोर ना समझें।

कलेक्टर वैद्य ने प्रशिक्षण में सम्मिलितों का माटिवेशन करते हुए कहा कि तुलनात्मक जो जानकारियां दी गई है उन पर मनन जरूर करें और अपनी कमजोरियों को दूर करें ताकि आने वाले समय में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक परिवेश मिल सकें। यहां पर जो जानकारी दी गई है वो अपने कार्यो में पर्णित करें। बच्चों और समाज के लिए हम क्या बेहतर दे सकते हैं, यह चिंतनीय और विचारणीय विषय है जिन पर सोच समझ परख असीमित है।

इससे पहले पांचवी और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले टापटेन स्कूलों के बीआरसी, बीईओ के द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्राप्ति के लिए क्या-क्या प्रबंध किए गए और उनका क्रियान्वयन कैसे किया गया के अनुभवो को उनके द्वारा सांझा किया गया। इसी प्रकार औसत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलो के द्वारा भी कमियों को रेखांकित किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश / उमेद

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