महिला दिवस विशेष : होम स्टे संचालन में महिलाओं ने मारी बाजी...गांवों में दिखता है रिश्तों का संगम

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महिला दिवस विशेष : होम स्टे संचालन में महिलाओं ने मारी बाजी...गांवों में दिखता है रिश्तों का संगम


- पर्यटकों के स्वागत से विदाई तक सब कुछ महिलाओं के हाथों में, सास-बहू, माँ-बेटी, देवरानी-जेठानी मिलकर चला रहीं होम स्टे

छिन्दवाडा, 07 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में होम स्टे के संचालन में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कहीं आगे हैं। मनेशी धुर्वे और अलका धुर्वे...छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्राम धूसावानी में रहने वाली यह महिलाएं रिश्ते में तो सास-बहू हैं, लेकिन जब पर्यटक होम स्टे में आते हैं तो दोनों मिलकर मेहमान नवाजी में जुट जाती हैं।

कुछ ऐसा ही होता है सावरवानी में, जहां मालती यदुवंशी अपनी सास शारदा यदुवंशी के साथ मिलकर होम स्टे चला रहीं हैं। छिंदवाड़ा जिले के सभी पर्यटन ग्रामों की महिलाएं अब होम स्टे व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

आय के साथ मिली पहचान-

ये होमस्टे न केवल उन्हें आय का साधन दे रहे हैं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी दुनिया के सामने ला रहे हैं। परंपरा और पर्यटन का यह संगम महिलाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है। खास बात यह है कि छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्रामों में पर्यटकों के बीच सास-बहू और मां-बेटी मिलकर काम करते हैं, जो मिसाल के तौर पर देखा जाता है। जिले के हर होम स्टे के संचालन में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है।

जिले में 50 होम स्टे संचालित

मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा होम स्टे वाले जिले छिंदवाड़ा में वर्तमान में 50 से अधिक होम स्टे संचालित हैं। सारे होम स्टे महिलाओं के नाम पर ही रजिस्टर्ड किए गए हैं। इन होम स्टे में अधिकांश काम महिलाएं ही संभालती हैं। छिंदवाड़ा के पर्यटन ग्राम सावरवानी, चोपना, काजरा, देवगढ़, चिमटीपुर, गुमतरा और धूसावानी में स्थानीय महिलाएं न केवल अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से अपनी पहचान बना रही हैं।

हाथों से बनाती स्वादिष्ट भोजन

ग्राम की महिलाएं अब पर्यटकों के लिए पारंपरिक और स्वादिष्ट स्थानीय भोजन तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही वे लोक नृत्य और लोक गायन के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं। इससे न केवल पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है, बल्कि महिलाओं को भी सम्मानजनक आय का साधन प्राप्त हो रहा है।

सारी कमान महिलाओं के हाथों में

विशेष बात यह है कि गांव की कई महिलाएं स्वयं होमस्टे का संचालन कर रही हैं और पर्यटकों के स्वागत, भोजन व्यवस्था तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रबंधन कर रही हैं। पर्यटकों की विदाई तक वे सारा काम अपने जिम्मे संभाले हुए हैं। इससे वे आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ ग्रामीण पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि होमस्टे की इस पहल से गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ ही सभी पर्यटन ग्रामों की पहचान भी तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में यहां पर्यटन गतिविधियों के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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