अशोकनगरः जिले में 5 करोड़ का आजीविका घोटाला, विधायक की शिकायत पर 2 साल बाद हरकत में आया प्रशासन

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अशोकनगरः जिले में 5 करोड़ का आजीविका घोटाला, विधायक की शिकायत पर 2 साल बाद हरकत में आया प्रशासन


अशोकनगर,01 जुलाई(हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में करीब 5 साल पहले हुए 5 करोड़ के एक बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस महाघोटाले को लेकर दो साल पहले की गई शिकायत पर अब जाकर लोकायुक्त पुलिस और नगरीय प्रशासन विभाग हरकत में आया है। इस कार्रवाई से जिले के चार नगरीय निकायों में हडक़ंप की स्थिति बनी हुई है।

क्या है पूरा मामला: भ्रष्टाचार बनाम आजीविका मिशन प्रशिक्षणबुधवार को जानकारी सामने आई है कि चंदेरी विधानसभा से विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने 19 जुलाई 2024 को लोकायुक्त एसपी (ग्वालियर) को एक लिखित शिकायत सौंपी थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2021-22 के दौरान जिले के चार नगरीय निकायों—अशोकनगर, चंदेरी, ईसागढ़ और शाढौरा में नियमों को ताक पर रखकर एक सोची-समझी आपराधिक साजिश को अंजाम दिया गया।

शिकायत में कहा गया था कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी, सिटी मिशन मैनेजर और योजना शाखा के प्रभारियों ने आपस में सांठगांठ की। बैंक खाते का दुरुपयोग कर इस फर्जीवाड़े के लिए पंजाब नेशनल बैंक (शिवाजी नगर, भोपाल) के एक खाते का इस्तेमाल किया गया। कागजों पर ट्रेनिंग कराई जाकर इस खाते के जरिए कुल 1,013 प्रशिक्षणार्थियों को फर्जी तरीके से आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षित होना दर्शाया गया। फर्जी रोजगार के तहत हद तो तब हो गई जब 495 प्रशिक्षणार्थियों को फर्जी तरीके से स्व-रोजगार से जुड़ा बताकर सरकारी राशि का आहरण कर लिया गया। शासकीय नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए ट्रेनिंग एजेंसियों के खातों में सीधे करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दिए गए।

दो साल बाद हरकत में आया नगरीय प्रशासन विभागलोकायुक्त की जांच का दायरा बढ़ते ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (मप्र) भी सक्रिय हो गया है। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे के निर्देश पर इस घोटाले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया गया है। जांच समिति में शामिल अधिकारी देवकीनंदन सिंह परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण,आनंद कुमार एवं बबीता मरकाम सहायक संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल हैं।

बुलावे पर भी नदारद रहे मुख्य नगरपालिका अधिकारी इस मामले में प्रशासनिक शिथिलता और अधिकारियों का डर साफ तौर पर सामने आ गया है। कलेक्टर (शहरी विकास), अशोकनगर द्वारा बीते 16 जून को ही चारों नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए थे।

अल्टीमेटम बेअसर: सभी चारों सीएमओ को 29 जून को जांच समिति के समक्ष सारे मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के आदेश दिए गए थे। लेकिन, कार्रवाई के डर से या किसी अन्य वजह से, निर्धारित तारीख पर एक भी मुख्य नगरपालिका अधिकारी जांच समिति के सामने हाजिर नहीं हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार

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