अनूपपुरः आरती की घंटियां सुनकर मंदिर पहुंचते हैं जंगली भालू, प्रसाद लेकर लौट जाते हैं जंगल
अनूपपुर, 22 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से सटे छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के जनकपुर क्षेत्र में स्थित ग्राम पंचायत उचेहरा का राजामाड़ा (रामवन) इन दिनों अपनी अनोखी घटना को लेकर चर्चा में है। यहां मंदिर में होने वाली सुबह-शाम की आरती और घंटियों की आवाज सुनकर जंगली भालू जंगल से निकलकर मंदिर परिसर तक पहुंच जाते हैं। प्रसाद ग्रहण करने के बाद ये भालू बिना किसी नुकसान या उपद्रव के वापस जंगल की ओर लौट जाते हैं।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित यह स्थान धार्मिक आस्था और प्रकृति के अनोखे मेल के रूप में पहचाना जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सिलसिला वर्ष 2013 से लगातार जारी है। जैसे ही मंदिर में आरती शुरू होती है और घंटियों की ध्वनि गूंजती है, जंगल से भालुओं का समूह कुटी परिसर में पहुंच जाता है।
बताया जाता है कि कई बार एक दर्जन से अधिक भालू एक साथ मंदिर पहुंचते हैं और पुजारी के हाथों से प्रसाद ग्रहण कर शांतिपूर्वक जंगल की ओर चले जाते हैं। इस दौरान उन्होंने कभी किसी ग्रामीण या श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाया।
कुटी में रहने वाले पुजारी सीताराम बाबा ने बताया कि वर्ष 2013 से पहले वे माहोरा पहाड़ क्षेत्र में रहते थे। बाद में जब वे राजामाड़ा (रामवन) पहुंचे, तो कुछ समय बाद ही यहां भालुओं का आना शुरू हो गया। धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया और अब हर दिन सुबह-शाम आरती के समय भालू मंदिर पहुंचते हैं।
पुजारी का कहना है कि “ये सिर्फ भालू नहीं हैं, ये जामवंत हैं। अगर आप इन्हें प्यार देंगे तो ये भी आपको प्यार देंगे।” जब उनसे पूछा गया कि इतने करीब आने वाले भालुओं से डर नहीं लगता, तो उन्होंने कहा कि “मुझे भालुओं से नहीं, इंसानों से डर लगता है।”
स्थानीय ग्रामीण इस घटना को बाबा की कृपा और भगवान का चमत्कार मानते हैं, वहीं कुछ लोग इसे वर्षों से बने आपसी विश्वास और भालुओं की स्वाभाविक आदत बताते हैं। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन जंगल के इन वन्य जीवों का मंदिर पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करना लोगों के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस अनोखे दृश्य को देखने दूर-दराज से भी लोग राजामाड़ा पहुंच रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

