अनूपपुर: न्यायालय के फैसले के बाद भी अमरकंटक के रंग महल मंदिर पूजा अर्चना पर रोक क्यो
अनूपपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में मां नर्मदा मंदिर के सामने स्थित प्राचीन विष्णु, शिव और सत्यनारायण भगवान का मंदिर पूजा अर्चना से वंचित था, जिस पर ब्रम्हलीन स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी ने लड़ाई लड़ी और स्थानिय न्यायालय से विजय श्री प्राप्त की थी। हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र प्राचीन रंग महल मंदिर 40 वर्षों से पूजा से वंचित हैं जबकि न्यायालय के आदेश के बाद भी प्रशासन विधि विधान से पूजा करनेका अधिकार नहीं दे रहा। परम धर्म सांसद शहडोल श्रीधर शर्मा ने शनिवार को बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार को बताया।
अनूपपुर जिले के पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा मंदिर के सामने प्राचीन कलचुरी कालीन रंगमहल मंदिर, जिसकी भव्यता सुंदरता देखने बनती है, जो कल्चुरी कालीन सैकडो साल का प्राचीन मंदिर है। यहां विष्णु, पातालेश्वर शिव, सतनारायण भगवान विराजे हैं और इन मंदिरों में पूजा - पाठ लगभग 40 सालों से बंद है। मंदिर परिसर को पुरातत्व विभाग ने अधिग्रहित कर लिया था और पूजा पाठ पर प्रतिबंध लगा दिया था। शंकराचार्य द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वर्गीय स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने भारत सरकार पुरातत्व विभाग प्रदेश सरकार के खिलाफ पूजा पाठ की अनुमति की मांग को लेकर 7 साल पहले 2015 में अपर सत्र न्यायालय (पुष्पराजगढ़) राजेंद्रग्राम की अदालत में शंकराचार्य जी के अधिवक्ता मुरलीधर शर्मा एवं श्रीधर शर्मा ने याचिका दर्ज की थी। मंदिर परिसर क्षेत्र और मंदिरों की संपूर्ण देखरेख और पूजा पाठ का उत्तरदायी द्वारिका शारदा पीठ की है। यह उल्लेख किया गया था कि इस वाद को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने द्वारिका शारदा पीठ के पक्ष में फैसला देते हुए मंदिरों पर पीठ द्वारा देखरेख एवं पूजा पाठ करने की अनुमति प्रदान कर राज्य सरकार पुरातत्व विभाग, जिला कलेक्टर को आदेश की प्रतिलिपी भेजी गई।
हिंदू आस्था के अनुसार और अमरकंटक के पुजारियों के बताए अनुसार किवदंती है कि रंग महल मंदिर के अंदर विराजे पातालेश्वर मंदिर में श्रवण मास में खुद गंगा मां मंदिर में आती हैं और शिव का अभिषेक करती हैं। आस्था के इस बड़े केंद्र मंदिर को पूजा पाठ से वंचित कर कहीं न कही क्षेत्रवासियों के अंदर रोष हैं। प्राचीन मंदिर जहां पहले से लोग जाते थे, वहां पूजा करते थे, आराधना करते थे, अमरकंटक वासियों का आस्था का केंद्र था, वह मंदिर बिना पूजा पाठ के जर्जर स्थिति में था। सिविल न्यायालय पुष्पराजगढ़ के आदेश के बाद अब वहां पूजा पाठ होना एवं सभी मंदिरों में पुजारी भी नियुक्त किया गया था। पंचायत शंकराचार्य द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद ने पूजा पाठ को लेकर भारत सरकार के आदेश के विरुद्ध पूजा रोकने के खिलाफ केस दर्ज करवाया। 8 साल बाद इस पर फैसला आया है। जिसके उपरांत न्यायालय ने मामले को रजिस्टर्ड कर आदेश जारी किया एवं पुरातत्व विभाग स्टेट गवर्नमेंट जिला कलेक्टर को इसकी प्रतिलिपि भेजी है कि प्राचीन रंग महल मंदिर का पूर्ण अधिकार द्वारका शारदा पीठ को है और पूर्णरूपेण पूजा का अधिकार प्राप्त है। विदित हो कि विगत वर्ष द्वारिका शारदा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरवस्ती जी का दुखद निधन हो गया, जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज को द्वारिकाशारदा पीठ के शंकराचार्य बनाए गए और उन्होंने इस खुशी को परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वर्गीय स्वरूपानंद सरस्वती जी की जीत बताई और खुशी भी व्यक्त की।
ब्रम्हलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के देहावसान के बाद वर्तमान में धर्माचार्यों की जिम्मेदारी हैँ ,स्वामी जी की मेहनत और अब तक रंग महल मंदिर में पूजा अर्चना की ओर ध्यान नहीं देना कहीं न कहीं सनातन संस्कृति को मानने वाले धर्मावलंबियों के आस्था पर ठेस है, जो कि सनातन धर्म और सनातनियो के लिए चिंतनीय है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

