जो विश्व का कल्याण चाहे वह हिन्दू है, अब हमें देश के लिए अच्छा काम करना होगा: अशोक सोहनी
उज्जैन, 11 जनवरी (हि.स.)। मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में रविवार को जयसिंहपुरा बस्ती स्थित केशवनगर में विराट हिन्दू महा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में लगभग 10 हजार की संख्या में हिन्दू समाज के लोग शामिल हुए। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह और धार्मिक वातावरण देखने को मिला। सम्मेलन का आयोजन नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में किया गया, जहां सुबह से ही समाजजन पहुंचने लगे थे।
सम्मेलन की विशेष बात यह रही कि इसमें मातृशक्ति की भागीदारी अत्यंत प्रभावशाली रही। क्षेत्र की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक गीत गाते हुए सम्मेलन स्थल तक पहुंचीं। इससे पूरे आयोजन में सांस्कृतिक और धार्मिक रंग घुल गया। जयसिंहपुरा बस्ती के विभिन्न मोहल्लों से युवाओं की टोलियां अनुशासित रूप से सम्मेलन में सम्मिलित हुईं। राजीव रत्न कॉलोनी से बालिकाओं ने कृष्ण और राधा का रूप धारण कर चल समारोह निकाला, जो आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र के पूर्व क्षेत्र संघचालक अशोक सोहनी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दू का अर्थ केवल किसी एक परंपरा या पूजा पद्धति तक सीमित नहीं है। हम सभी सनातनी हिन्दू हैं। कोई भगवान को मानता है, कोई नहीं मानता, लेकिन सबका कल्याण और विश्व का कल्याण यह हमारी मूल भावना है। जो गंगा यात्रा पर जाते हैं, जो रामायण और गीता को मानते हैं, जो समान जीवन मूल्यों में विश्वास रखते हैं, वे सभी हिन्दू हैं।
अशोक सोहनी ने कहा कि हमारी मातृभूमि भारत माता है और उसका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। देश की स्वतंत्रता के लिए अनेक लोगों ने बलिदान दिए हैं। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि भारत कभी विश्व गुरु और अत्यंत समृद्ध राष्ट्र था, लेकिन नागरिकों में एकता और राष्ट्रीय भावना की कमी के कारण देश गुलामी का शिकार हुआ।
उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेज संख्या में बहुत कम थे, फिर भी उन्होंने वर्षों तक शासन किया, क्योंकि भारतीय समाज में फूट थी। उस समय न राष्ट्रीय भावना थी और न ही देश के प्रति समर्पण। अंग्रेजों के लिए काम करने वाली पुलिस भी भारतीय थी और गिरफ्तार होने वाले क्रांतिकारी भी भारतीय। इस आंतरिक विभाजन का लाभ उठाकर अंग्रेजों ने देश पर शासन किया और उसे लूटा।
सोहनी ने कहा कि जब तक लोगों के मन में यह भाव नहीं आएगा कि यह देश हमारा है, यह गंगा मैया और नर्मदा मैया हमारी हैं, तब तक सच्चा राष्ट्रभाव नहीं जागेगा। इसी भावना के जागरण के लिए डॉ. हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि संघ को आज 100 वर्ष हो चुके हैं और इतने वर्षों में न तो कोई आंतरिक झगड़ा हुआ और न ही किसी प्रकार की कुर्सी की राजनीति देखने को मिली। इसका कारण यह है कि संघ में लोग बिना किसी स्वार्थ के कार्य करते हैं।
उन्होंने संघ के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि चाहे नदी में आई बाढ़ हो, भूकंप हो, भोपाल गैस कांड हो या हाल ही में कोविड महामारी हर आपदा में संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ सेवा की। क्योंकि संघ का भाव है कि पूरा समाज अपना है। जब समाज पर संकट आता है, तो उसकी सेवा करना हमारा कर्तव्य है। अशोक सोहनी ने कहा कि जैसे शरीर के किसी एक अंग में कांटा चुभता है तो पूरा शरीर उसे निकालने में सक्रिय हो जाता है, वैसे ही देश में कहीं भी संकट आए तो पूरे समाज को एकजुट होकर उसका समाधान करना चाहिए। उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कोई ऊंचा-नीचा नहीं होना चाहिए। हम सब राम की संतान हैं और देश में रामत्व की भावना स्थापित करनी होगी।
उन्होंने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने लव जिहाद, जनसंख्या असंतुलन और सामाजिक जागरूकता की कमी को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए समाज को संगठित और शक्तिशाली बनना होगा। स्वार्थ त्यागकर एकजुट होकर कार्य करना ही समाधान है।
कार्यक्रम में निर्मोही अखाड़े के जस्सू गुरु, मातृशक्ति की ओर से राष्ट्रीय सेविका समिति की जिला संयोजक अनिता पवार, हिंदू सम्मेलन संयोजक अशोक माली मंचासीन रहे। सभी अतिथियों का शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मोहनलाल कुमावत, कुंदन माली, विष्णु बैरागी, विजय चौधरी, भरत भाट, चंपाराम सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्मेलन में मातृशक्ति का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

