हार्वेस्टर से कटाई कराएं, खेतों में नरवाई न जलाएं किसान: डॉ. अखिलेश कुमार

WhatsApp Channel Join Now
हार्वेस्टर से कटाई कराएं, खेतों में नरवाई न जलाएं किसान: डॉ. अखिलेश कुमार


रीवा, 16 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश स्थित कृषि विज्ञान केंद्र रीवा के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार ने किसानों को समसामयिक कृषि सलाह देते हुए कहा है कि गेहूं सहित अन्य फसलों की कटाई हार्वेस्टर से कराएं, लेकिन खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) बिल्कुल न जलाएं।

उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी में पाए जाने वाले लाभदायक जीवाणु और सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषित होता है, भूमि कठोर हो जाती है और उसकी जलधारण क्षमता कम हो जाती है। इससे वातावरण का तापमान भी बढ़ता है।

डॉ. कुमार ने कहा कि खेत में पड़ा भूसा, डंठल और अन्य जैविक अवशेष सड़ने के बाद भूमि को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाते हैं। यदि किसान नरवाई नहीं जलाकर स्ट्रा रीपर का उपयोग करें, तो उससे भूसा बनाकर पशुओं को खिलाया जा सकता है। इसके अलावा मिट्टी पलटने वाले हल से अवशेषों को खेत में मिलाकर जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि नरवाई को एकत्र कर नाडेप पिट और वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है, जिससे जैविक खाद बनती है। इससे खेतों में जैव विविधता बनी रहती है और मित्र कीट शत्रु कीटों को नष्ट करने में मदद करते हैं। भूमि में कार्बनिक पदार्थ बढ़ने से उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।

दलहनी फसलों के अवशेष खेत में मिलाने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे अगली फसल को लाभ मिलता है। वहीं बायो डाइजेस्टर तकनीक के माध्यम से कृषि अपशिष्ट को बायोगैस और जैविक खाद में बदला जा सकता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा और उर्वरक आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक है।

उड़द और मूंग में पीला रोग नियंत्रण की सलाह

उड़द एवं मूंग की फसल में पीला रोग लगने पर किसान इमीडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 8 मिली मात्रा प्रति टंकी, या थायोमेथोक्साम व इमीडाक्लोप्रिड मिश्रित दवा की 10 मिली मात्रा प्रति टंकी (15 लीटर पानी) में मिलाकर छिड़काव करें।

प्याज में झुलसा रोग का प्रकोप

रीवा क्षेत्र में प्याज की फसल में झुलसा रोग देखा जा रहा है, जिसमें पत्तियां ऊपर से पीली पड़कर सूखने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए किसान कैप्टान + हेक्साकोनाजोल मिश्रित दवा की 30 ग्राम मात्रा प्रति टंकी, या प्रोपिकोनाजोल + डायफेनोकोनाजोल की 20 एमएल मात्रा प्रति टंकी, अथवा टेबुकोनाजोल 25.9% ईसी की 25 एमएल मात्रा प्रति टंकी की दर से छिड़काव करें।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

Share this story