झाबुआ: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री पूजा के साथ श्रीहरि विष्णु मंदिरों में किया गया ज्येष्ठा अभिषेक
झाबुआ, 29 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले के विभिन्न नगरीय एवं ग्रामीण इलाकों में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को सुहागिन महिलाओं द्वारा वटवृक्ष की पूजा कर वटसावित्री व्रत विधान संपन्न किया गया।
इस अवसर पर महिलाओं ने अपने परिवार की सुख समृद्धि एवं दिर्घायुष्य के निमित्त वटवृक्ष की पूजा कर वटसावित्री व्रत विधान संपन्न किया। आज इस ऊर्जावान दिवस पर प्राचीन श्रीविष्णु मंदिरों एवं शिवालयों ज्येष्ठा अभिषेक सहित विशेष पूजा अर्चना की गई।
ज्येष्ठ मास पूर्णिमा के मौके पर ज्येष्ठा नक्षत्र की वेला में जिला मुख्यालय स्थित गोवर्धननाथ की हवेली मंदिर में पवित्र जल से भगवान् श्री गोवर्धननाथ का अभिषेक किया गया। इसके साथ ही जिले के विभिन्न जनपदीय एवं ग्रामीण इलाकों में स्थित मंदिरों में भी विधि पूर्वक भगवान् का अभिषेक एवं पूजा अर्चना की गई। वट सावित्री व्रत पर्व पर वटदेव की विधिवत पूजा अर्चना के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं अपने समीपवर्ती भगवान् श्रीहरि विष्णु मंदिरों और शिवालयों में दर्शनार्थ पहुंची।
जिले के विभिन्न नगरीय एवं ग्रामीण इलाकों में सोमवार को सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत रखकर तथा श्रद्धा पूर्वक वट देवता की पूजा अर्चना करते हुए जहां अपने सुहाग ओर परिवार के प्रति शुभ मंगल की कामना की गई, वहीं इस पूजा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का दिव्य संदेश भी प्रसरित किया गया।
ज्येष्ठ मास पूर्णिमा के मौके पर ज्येष्ठा नक्षत्र की वेला में जिला मुख्यालय स्थित गोवर्धननाथ की हवेली मंदिर में पवित्र जल से भगवान् श्री गोवर्धननाथ का अभिषेक किया गया। इसके साथ ही जिले के विभिन्न जनपदीय एवं ग्रामीण इलाकों में स्थित मंदिरों में भी विधि पूर्वक भगवान् का अभिषेक एवं पूजा अर्चना की गई।
जिले में विभिन्न नगरीय एवं ग्रामीण इलाकों में आज प्रातः कालीन वेला में ही सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने समीपवर्ती पुराने वटवृक्ष की पूजा का सिलसिला शुरू कर दिया गया, जो दोपहर तक जारी रहा। जिले में विभिन्न स्थानों पर अपने पास के वटवृक्ष के तले बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने विधि पूर्वक पूजा अर्चना कर एवं कच्चे सूत (धागे) को लपेटते हुए वटदेव की परिक्रमा की, और वटसावित्री की कथा श्रवण कर व्रत अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान की। जिला मुख्यालय स्थित सिद्धैश्वर मंदिर, तालाब किनारे स्थित श्री जगदीश मंदिर, एवं गोपाल कालोनी में गोपाल मंदिर स्थित वटवृक्ष, जिले के थांदला मे पद्मावती नदी किनारे एवं गढ़ी स्थित प्राचीन वटवृक्ष की षोडशोपचार विधि से पूजा अर्चना की गई। थांदला में श्री पट्टाभिराम मंदिर के पुजारी पंडित किशोर आचार्य द्वारा शास्त्रोक्त विधि विधान पूर्वक वट सावित्री की पूजा अर्चना संपन्न कराई गई। हमारे शास्त्रों में वर्णित भारतीय संस्कृतिक परंपरा एवं धार्मिक महत्व के इस महत्वपूर्ण पर्व पर आचार्य गणों द्वारा पूजन कराए जाने के बाद सौभाग्यवती महिलाओं ने वटदेवता की परिक्रमा की, और फिर उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ आयु, अक्षय सौभाग्य तथा निरन्तर अभ्युदय ओर सुख समृद्धि की कामना करते हुए व्रत का अनुष्ठान किया गया। पूजा के आखिर में महिलाओं ने आचार्य गणों की भी पूजा कर उनसे आशीर्वाद लिया।
सनातन धर्म में शास्त्रों के मतानुसार वटवृक्ष में त्रिदेवों सहित सावित्री को प्रतिष्ठित बताया गया है, अतः सुहागिन महिलाओं द्वारा वटवृक्ष की इसी रूप में पूजा कर व्रत का अनुष्ठान किया जाता रहा है, और परंपरागत रूप से वटवृक्ष, ब्रह्म सावित्री, सत्यसावित्री एवं धर्म राज महाराज की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रयागराज गंगा के तट पर अक्षय वट प्रतिष्ठित है, और इसी वटवृक्ष के नीचे दैवी सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म पालन से अपने मृत पति सत्यवान को पुनः जीवित किया था, तब से ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से जाना जाता है, और इसी रूप में इसे आस्था पूर्वक किया जाता है।
इस अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित श्री गोवर्धन नाथ मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर ज्येष्ठा नक्षत्र में परंपरागत रूप से सरोवर से लाए गए पवित्र जल से भगवान् श्री गोवर्धननाथ का अभिषेक किया गया। यहां ज्येष्ठ पूर्णिमा के एक दिन पहले सरोवर की पूजा कर रजत घट में कुएं का जल भरकर लाया जाता है, और इसी पवित्र जल से विधि पूर्वक भगवान् का अभिषेक किया जाता है। पूर्णिमा एवं ज्येष्ठा नक्षत्र आज सोमवार को है, इसलिए श्री गोवर्धननाथ मंदिर के पुजारी सहित बड़ी संख्या में एकत्र हुए श्रद्धालु रविवार को बाजे गाजे के साथ सरोवर तट पर पहुंचे, और सरोवर की पूजा कर समीप स्थित कुएं से रजत घट में पवित्र जल लाया गया, और आज प्रातः कालीन वेला में वेदपाठी विद्वान ब्राह्मणों द्वारा इसी जल से पुरूसुक्त के मंत्रों द्वारा विधि-विधान पूर्वक भगवान् श्री गोवर्धननाथ का ज्येष्ठा अभिषेक
किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

