41 साल से सड़क की राह देख रहा कोड़ार गांव, कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
उमरिया, 18 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के मानपुर विकासखंड का ग्राम कोड़ार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 41 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने 14 जुलाई 1985 को गांव का दौरा कर आदिवासी परिवारों से मुलाकात की थी। इसके बाद गांव में बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं पहुंचीं, लेकिन सड़क के नाम पर बनाई गई मिट्टी-मुरम की राह आज तक पक्की नहीं हो सकी। बारिश के मौसम में करीब एक किलोमीटर का यह रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।
कोड़ार ग्राम पंचायत में बड़ी संख्या में बैगा आदिवासी परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों तक कई बार आवेदन दिए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। करीब 700 मीटर सड़क का निर्माण नहीं होने से तीन पंचायतों के लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है।
बारिश के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। कीचड़ के कारण बच्चों के कपड़े और बस्ते खराब हो जाते हैं तथा कई बार ग्रामीण फिसलकर घायल भी हो जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक प्रसूताओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती है। सड़क खराब होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते और कई बार मरीजों को रास्ते में उठाकर ले जाना पड़ता है।
ग्रामीण रामू बैगा ने बताया कि इस मार्ग से तीन-चार गांवों के लोगों का आवागमन होता है। प्रसूता को अस्पताल ले जाने के लिए वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने बताया कि विधायक, कलेक्टर, पंच और सरपंच सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हुआ।
गज्जू बैगा ने बताया कि गांव में सड़क के साथ पानी की भी समस्या है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से ग्रामीण परेशानी झेल रहे हैं। प्रसूताओं को सड़क तक ले जाने के लिए ग्रामीणों को उन्हें उठाकर ले जाना पड़ता है। उनके अनुसार कोड़ार में करीब 15 बैगा परिवार रहते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गांव की पिंकी यादव ने बताया कि सड़क की स्थिति बेहद खराब है। बच्चों के स्कूल जाने के दौरान उनकी वर्दी और बस्ते कीचड़ से खराब हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब से वह गांव में रह रही हैं, तब से सड़क की यही स्थिति बनी हुई है। बारिश में लोग फिसलकर गिरते हैं और कई बार हाथ-पैर में चोट लग जाती है।
ग्रामीणों की समस्या को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने भी प्रशासन को पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग की है। इसके बावजूद अभी तक सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
उल्लेखनीय है कि मानपुर विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। यहां से विधायक एवं पूर्व आदिम जाति कल्याण विभाग की कैबिनेट मंत्री मीना सिंह हैं। विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच कोड़ार गांव की सड़क की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर सामने रखती है। ग्रामीणों की मांग है कि बरसात में उनकी परेशानी को देखते हुए सड़क का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और मरीजों तथा प्रसूताओं को भी समय पर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

