तेज बारिश की आस में अनोखा टोटका, भोपाल में गधों को खिलाए गुलाब जामुन, इंद्रदेव से की झमाझम बारिश की प्रार्थना
भोपाल, 18 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त चाल और लगातार कम हो रही बारिश ने किसानों से लेकर आम लोगों तक की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी भोपाल में कई दिनों से तेज बारिश नहीं होने और बढ़ती उमस के बीच शनिवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। कोलार रोड स्थित गेस्ट हाउस (कोलार तिराहा) के पास स्थानीय लोगों ने वर्षों पुरानी लोकमान्यता के तहत गधों को फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया और उन्हें गुलाब जामुन खिलाकर इंद्रदेव से अच्छी बारिश की प्रार्थना की।
यह अनोखा आयोजन देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बड़ी संख्या में राहगीर वहां रुक गए, कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद यह आयोजन तेजी से वायरल हो गया। आयोजकों का कहना है कि यह कोई नया प्रयोग नहीं, बल्कि मालवा-निमाड़ अंचल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षों से चली आ रही लोक परंपरा का हिस्सा है। मान्यता है कि जब मानसून कमजोर पड़ जाता है या समय पर बारिश नहीं होती, तब गधों को मिठाई खिलाकर और उनका सम्मान कर इंद्रदेव को प्रसन्न करने की प्रार्थना की जाती है, जिससे अच्छी वर्षा होती है। आयोजन के दौरान लोगों ने इंद्र देव मान जाओ लिखी तख्तियां भी हाथों में लेकर प्रदेश में झमाझम बारिश, किसानों की खुशहाली और जल स्रोतों के भरने की कामना की।
आयाेजक मुजाहिद सिद्दीकी ने बताया कि प्रदेश का किसान खरीफ फसलों की बोवनी कर चुका है और खेती पर लाखों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी खत्म होने लगी है। यदि जल्द अच्छी वर्षा नहीं हुई तो धान, सोयाबीन, मक्का, कपास सहित कई फसलें प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी राजनीतिक विरोध के लिए नहीं, बल्कि किसानों, जल स्रोतों और पूरे प्रदेश की खुशहाली की कामना के लिए किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंद्रदेव मेहरबान होंगे और प्रदेश में जल्द अच्छी बारिश होगी।
शीतला माता और गधे से जुड़ी है लोकमान्यता
स्थानीय लोगों ने बताया कि लोकविश्वास के अनुसार गधा शीतला माता का वाहन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब गधे को मिठाई खिलाकर उसका सम्मान किया जाता है तो शीतला माता प्रसन्न होती हैं और इंद्रदेव अच्छी वर्षा करते हैं। हालांकि इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी कई लोग इसे आस्था और परंपरा के रूप में निभाते हैं।
सोशल मीडिया पर छाया आयोजन
गधों को गुलाब जामुन खिलाने का यह अनोखा दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। किसी ने इसे लोक आस्था का प्रतीक बताया तो किसी ने बारिश की उम्मीद में किया गया अनूठा प्रयास कहा। राहगीरों के लिए भी यह आयोजन आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मौसम विभाग ने जताई बारिश की उम्मीद
प्रदेश में पिछले कई दिनों से तेज बारिश का दौर थमा हुआ है, जिससे औसत वर्षा का आंकड़ा लगातार नीचे आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने और प्रदेश पर सक्रिय विभिन्न मौसम प्रणालियों के प्रभाव से आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। कई जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा पूरी तरह मौसमीय तंत्र और वैज्ञानिक कारणों पर निर्भर करती है तथा इस प्रकार के टोटकों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद कठिन परिस्थितियों में लोक परंपराएं और धार्मिक आस्थाएं लोगों को मानसिक संबल और उम्मीद देती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश की कामना के लिए मेंढकों का विवाह, विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ और पशुओं को विशेष भोजन कराने जैसी परंपराएं लंबे समय से चली आ रही हैं।
फिलहाल भोपाल में गधों को गुलाब जामुन खिलाने का यह अनोखा आयोजन पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि आस्था से जुड़ा यह प्रतीकात्मक प्रयास कब तक मानसून को फिर से सक्रिय करता है और प्रदेश में झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

