अशोकनगरः मोबाइल नहीं मिला तो फंदे पर झूला युवक, देवदूत बनकर पहुंची पुलिस!
अशोकनगर, 14 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में आज के डिजिटल युग में एक मोबाइल फोन की जिद किसी की जान पर कैसे भारी पड़ सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण ग्राम अर्रोन तलैया में देखने को मिला, लेकिन यहां पुलिस की तत्परता किसी 'मिरेकल' (चमत्कार) से कम नहीं रही। महज़ 18 साल के एक युवक की जिंदगी और मौत के बीच खड़ी खाकी ने हार नहीं मानी और एक चिराग को बुझने से बचा लिया।
घटनाक्रम: सांसे थाम देने वाले वो पल
गुरुवार सुबह 8 बजे जब गांव में चहल-पहल शुरू ही हुई थी, तभी डायल-112 पर एक घबराई हुई आवाज आई- साहब, मेरे बेटे ने कमरा बंद कर लिया है, वो फांसी लगा रहा है! सूचना मिलते ही आरक्षक सुनील बघेल ने बिना वक्त गंवाए थाना प्रभारी सेहराई को अलर्ट किया। पलक झपकते ही सउनि. गोपाल सिंह और टीम मौके पर पहुंच गई। अंदर पहाड़ सिंह आदिवासी (18) मौत को गले लगाने की तैयारी कर चुका था।
'ऑपरेशन जिंदगी': बिना बल प्रयोग जीता दिल
कमरा अंदर से बंद था, समय बहुत कम था। पुलिस चाहती तो दरवाजा तोड़ सकती थी, लेकिन युवक की मानसिक स्थिति को देखते हुए टीम ने 'संवाद' का रास्ता चुना।
विश्वास की डोर: पुलिस अधिकारियों ने दरवाजे के बाहर से ही युवक से बात करना शुरू किया।
बड़ा भाई बनकर समझाया: टीम ने उसे यकीन दिलाया कि समस्या मोबाइल की नहीं, भावनाओं की है। उसकी हर बात सुनी जाएगी और परिवार भी साथ देगा।
नतीजा: लगभग आधे घंटे की मशक्कत और समझाइश के बाद, आखिरकार युवक का दिल पिघल गया। उसने कमरे की कुंडी खोली और बाहर निकल आया।
पूछताछ में युवक ने स्वीकार किया कि परिवार द्वारा मोबाइल दिलाने से मना करने पर उसने गुस्से में यह कदम उठाया था। पुलिस की बातों ने उसे अहसास कराया कि जीवन एक मोबाइल से कहीं ज्यादा कीमती है।
हिन्दुस्थान समाचार/देवेन्द्र ताम्रकार
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

