ट्रायफेड का स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर जनजातीय अर्थतंत्र को देगा नई दिशा- सीपीओ संदीप कुमार

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ट्रायफेड का स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर जनजातीय अर्थतंत्र को देगा नई दिशा- सीपीओ संदीप कुमार


ट्रायफेड का स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर जनजातीय अर्थतंत्र को देगा नई दिशा- सीपीओ संदीप कुमार


ट्रायफेड का स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर जनजातीय अर्थतंत्र को देगा नई दिशा- सीपीओ संदीप कुमार


झाबुआ, 06 जनवरी (हि.स.)। जनजातीय शिल्पकार नामिका मेला जैसे आयोजनों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए, किंतु इनका सकारात्मक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब इससे शिल्पकारों एवं स्व-सहायता समूहों की आय में वास्तविक वृद्धि होगी। यह बात नीति आयोग की ओर से जिले के लिए नामित सीपीओ संदीप कुमार मिश्रा ने मध्यप्रदेश के झाबुआ में जिला प्रशासन एवं ट्रायफेड के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित जनजातीय शिल्पकार “नामिका” मेला आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में कही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कलेक्टर नेहा मीना द्वारा की गई। आयोजित कार्यक्रम के दौरान डिप्टी कलेक्टर सुश्री अवनधती प्रधान, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, आर एस बघेल, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती सुप्रिया बिसेन सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

सीपीओ ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि यदि ट्रायफेड द्वारा जिले में स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर की स्थापना की जाती है, तो यह जनजातीय अर्थतंत्र के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि शिल्पकारों एवं संबंधित अधिकारियों को जोड़ते हुए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए, जिससे निरंतर संपर्क बना रहे और समय-समय पर आवश्यक सुझाव दिए जा सकें, साथ ही उन्होंने पैकेजिंग एवं प्रोसेसिंग से संबंधित जानकारी, एफएसएसएआई प्रमाणन तथा ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लिए मार्गदर्शन दिए जाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कलेक्टर नेहा मीना ने कहा कि जिले की जनजातीय संस्कृति एवं पारंपरिक उत्पादों को पहचान दिलाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस मेले के माध्यम से जिले के 25 से अधिक स्व-सहायता समूहों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। मेले में ट्राइबल ज्वैलरी, मिट्टी के बर्तन, झाबुआ की पारंपरिक गुड़िया सहित अन्य प्रसिद्ध उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रायफेड से अपेक्षा है कि उनके द्वारा जिले के शिल्पकारों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। आवश्यक होने पर उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हेतु विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि जिले में पिथोरा आर्ट की कार्यशाला के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाकर संबंधित समूहों ने सशक्त शुरुआत की है।

कलेक्टर ने कहा कि सभी उत्पादों एवं समूहों का पंजीयन सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। विपणन में सहायता के लिए ट्रायफेड की महत्वपूर्ण भूमिका है। गहन अध्ययन एवं निरंतर सुधार के माध्यम से झाबुआ के शिल्पकारों की प्रतिभा एवं मेहनत को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

ट्रायफेड भोपाल के विपणन अधिकारी योगेश यादव ने ट्रारफेड के उद्देश्य और कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ट्रायफेड का मुख्य उद्देश्य जनजातीय भाई-बहनों को सशक्त विपणन मंच उपलब्ध कराना है। जनजातीय शिल्पकारों को इम्पैनल कर मेलों एवं प्रदर्शनियों के माध्यम से उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि ट्राइब्स इंडिया के नाम से देशभर में 120 से अधिक आउटलेट्स संचालित हैं, जहां जनजातीय उत्पादों की बिक्री की जाती है। इसके अतिरिक्त ट्राइब्स इंडिया के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी मार्केटिंग में सहयोग दिया जाता है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह सीधे ट्रायफेड से जुड़कर विभिन्न जिलों एवं राज्यों में अपने उत्पादों के विपणन का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। प्रदर्शनी एवं मेलों में भाग लेने हेतु शिल्पकारों को ले जाने का व्यय ट्रायफेड द्वारा वहन किया जाता है।

ट्रायफेट अधिकारी ने कहा कि आयोजित मेले में प्रदर्शित उत्पादों का अवलोकन किया जा रहा है और जो उत्पाद विक्रय योग्य पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत पंजीयन कर ट्रायफेड से जोड़ा जाएगा। पिथोरा आर्ट से जुड़े समूहों को शीघ्र जोड़ा जाएगा। वहीं फूड प्रोडक्ट्स के लिए एफएसएसएआई की आवश्यकताओं के अनुरूप सैंपल, सर्टिफिकेशन एवं अन्य प्रक्रियाओं के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत शिल्पकार भी सीधे ट्रायफेड से जुड़ सकते है।

मुख्य अतिथि द्वारा जिले के विभिन्न शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों एवं योजनाओं के हितग्राहियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया, साथ ही विभिन्न समूहों को पैकेजिंग एवं ऑर्गेनिक फार्मिंग से संबंधित सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया के संबंध में भी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि ट्रायफेड भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत संस्था है, जो जनजातीय शिल्पकारों एवं स्व-सहायता समूहों को विपणन, ब्रांडिंग एवं बाजार से जोड़ने का कार्य करती है। ट्रायफेड द्वारा “ट्राइब्स इंडिया” ब्रांड के माध्यम से मेलों, प्रदर्शनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एवं आउटलेट्स पर जनजातीय उत्पादों के विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही प्रशिक्षण, पंजीयन, पैकेजिंग, प्रमाणन एवं विपणन सहयोग प्रदान कर शिल्पकारों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

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