अनूपपुरः गाज मंदिर की धुंधली होती पहचान, बिखरे अवशेष और शराबखोरी से आहत हो रही धार्मिक भावनाएं

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अनूपपुरः गाज मंदिर की धुंधली होती पहचान, बिखरे अवशेष और शराबखोरी से आहत हो रही धार्मिक भावनाएं


अनूपपुर, 22 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के रूप में पहचान रखने वाला गाज मंदिर इन दिनों उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। जिला मुख्यालय स्थित लाडली लक्ष्मी पार्क में मंदिर का पुनर्निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन परिसर में आज भी पुराने मंदिर के अवशेष बिखरे पड़े हैं। इन अवशेषों पर देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं, जिनका उचित संरक्षण नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंदिर परिसर की नियमित साफ-सफाई और निगरानी नहीं होने के कारण यह स्थान असामाजिक तत्वों का ठिकाना बनता जा रहा है। परिसर में शराब की खाली और टूटी बोतलें अक्सर नजर आती हैं। पहले यह क्षेत्र खुला हुआ था, जिससे शराब पीने वाले लोग यहां आसानी से पहुंच जाते थे। वर्तमान में फेसिंग कर दी गई है, लेकिन इसके बावजूद शराबखोरी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।

आकाशीय बिजली से बचाव के उद्देश्य से बनाया गया था मंदिर

गाज मंदिर मूल रूप से पुष्पराजगढ़ क्षेत्र के कोयलारी में स्थित था। समय के साथ मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो गया था। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर नंद कुमारम की पहल पर मंदिर के अवशेषों को जिला मुख्यालय लाकर लाडली लक्ष्मी पार्क परिसर में नए स्वरूप में स्थापित किया गया।

बताया जाता है कि इस मंदिर में किसी देवी-देवता की मूर्ति स्थापित नहीं है, लेकिन इसका स्वरूप ऐतिहासिक महत्व के कारण संरक्षित किया गया है। मान्यता है कि पुराने समय में क्षेत्र के राजाओं ने आकाशीय बिजली से बचाव के उद्देश्य से इस मंदिर का निर्माण कराया था। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर बिजली के प्रभाव को अपने भीतर समाहित कर लेता था।

ऐतिहासिक महत्व से अनजान हैं लोग

वर्तमान में लाडली लक्ष्मी पार्क में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन मंदिर के इतिहास और महत्व की जानकारी देने के लिए यहां कोई सूचना पटल नहीं लगाया गया है। इसके चलते अधिकांश लोग इस धरोहर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अनभिज्ञ हैं।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मंदिर परिसर की नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और पुराने अवशेषों का संरक्षण किया जाए। साथ ही मंदिर के इतिहास और महत्व से संबंधित जानकारी देने वाला बोर्ड भी लगाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर को जान सकें।

कलेक्टर ने दिए संरक्षण के निर्देश

मंदिर के बिखरे पड़े अवशेषों को लेकर लोगों की शिकायत के बाद कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कहा कि गाज मंदिर परिसर की वर्तमान स्थिति में सुधार किया जाएगा। मंदिर के अवशेषों को सुरक्षित तरीके से कलेक्टर स्थित पुरातत्व भवन में संरक्षित किया जाएगा। साथ ही मंदिर के महत्व से संबंधित सूचना पटल भी परिसर में लगाया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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