विजयादशमी पर महाराजा छत्रसाल द्वितीय को भेंट की गई विजय की तलवार और पान-बीड़ा

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विजयादशमी पर महाराजा छत्रसाल द्वितीय को भेंट की गई विजय की तलवार और पान-बीड़ा


पन्ना, 21 अक्टूबर (हि.स.)। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा के अनुरूप विजयादशमी पर पन्ना के खेजड़ा मंदिर में महाराजा छत्रसाल द्वितीय को विजय की तलवार और पान-बीड़ा भेंट किया गया। कार्यक्रम में छतरपुर के महाराजा छत्रसाल के वंशज विक्रम सिंह बुंदेला भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर दस दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ भी हुआ। मंदिर परिसर में संतों के प्रवचन, धर्मोपदेश और भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालु देर रात तक धार्मिक आयोजन में शामिल रहे।

महामति प्राणनाथ और महाराजा छत्रसाल की परंपरा से जुड़ा आयोजन

खेजड़ा मंदिर में विजयादशमी पर तलवार और पान-बीड़ा भेंट करने की परंपरा का संबंध महामति प्राणनाथ जी और महाराजा छत्रसाल के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक संबंधों से माना जाता है। मान्यता है कि महामति प्राणनाथ जी ने धर्म और देश की रक्षा के लिए महाराजा छत्रसाल को आशीर्वाद और मार्गदर्शन दिया था। इसी प्रसंग की स्मृति में हर वर्ष दशहरे पर यह परंपरा निभाई जाती है।

मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ महाराजा छत्रसाल द्वितीय को तलवार और पान-बीड़ा भेंट किया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने बुंदेलखंड के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास का स्मरण किया।

चार सौ वर्षों से निभाई जा रही परंपरा

कार्यक्रम में महाराजा छत्रसाल द्वितीय ने सुंदरसाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निजानंद संप्रदाय में लगभग 400 वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। उनके अनुसार, महामति प्राणनाथ जी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से महाराजा छत्रसाल ने 52 युद्धों में विजय प्राप्त की थी।

इस आयोजन में श्री 108 प्राणनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश भाई पटेल, उपाध्यक्ष डी.के. दुबे, सचिव प्रेमकिशोर शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। मंदिर के पुजारी पवन शर्मा और दीपक शर्मा समेत हजारों की संख्या में सुंदरसाथ के श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

शरद पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ

विजयादशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के साथ दस दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव की भी शुरुआत हुई। मंदिर परिसर में धार्मिक प्रवचनों और भक्ति संगीत के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपराओं के प्रति लोगों के जुड़ाव को दर्शाया।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे

Livevns.news Desk
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