उज्जैनः तीन दिवसीय नाट्य उत्सव का समापन,‘परसाई उवाच’ के मंचन ने दर्शकों को लगवाए ठहाके

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उज्जैनः तीन दिवसीय नाट्य उत्सव का समापन,‘परसाई उवाच’ के मंचन ने दर्शकों को लगवाए ठहाके


उज्जैन , 31 मार्च (हि.स.)। कला चौपाल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य उत्सव का समापन मंगलवार रात्रि को हुआ। तीसरे और अंतिम दिन ‘परसाई उवाच’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को खुब ठहाके लगवाए। व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के कालजयी व्यंग्यों पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति ने उनकी लेखनी की प्रासंगिकता को जीवंत कर दिया।

नाटक ‘परसाई उवाच’ में समाज के उन चरित्रों को मंच पर उतारा गया, जो हमारे आसपास रोज़ दिखाई देते हैं, लेकिन अक्सर हमारी नजरों से ओझल रह जाते हैं। प्रस्तुति में चार प्रमुख व्यंग्य कथाओं ‘शवयात्रा का तौलिया’, ‘मध्यम वर्गीय कुत्ता’, ‘वह क्या था’ और ‘बातूनी’ को सशक्त अभिनय और सटीक मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। हर कथा ने अपने भीतर छिपे व्यंग्य के माध्यम से दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया।

‘शवयात्रा का तौलिया’ में पुण्य के नाम पर दिखावे की प्रवृत्ति को उजागर किया गया, जहां एक व्यक्ति सौ शवयात्राओं में शामिल होकर अपने स्वार्थ की पूर्ति करता है। वहीं ‘मध्यम वर्गीय कुत्ता’ में मध्यम वर्ग के व्यक्ति की दुविधा और सामाजिक दबावों को बेहद मार्मिक और हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। ‘वह क्या था’ ने समाज से कटे हुए व्यक्ति की मानसिक स्थिति को उजागर किया, जबकि ‘बातूनी’ ने उन लोगों की आदतों पर व्यंग्य किया, जो निरर्थक बातों से दूसरों की सहनशीलता की परीक्षा लेते हैं।

नाटक में मुख्य पात्र योगेश कुमार उमाठे और संतोष सुमन ने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। दोनों कलाकारों की संवाद अदायगी, भाव-भंगिमा और टाइमिंग ने प्रस्तुति को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन तरुण पांडे का था। उन्होंने परसाई जी के व्यंग्यों को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए मंच पर एक नई ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया। उनका निर्देशन सादगी,संवेदनशीलता के साथ जटिल व्यंग्य को दर्शकों तक सहज पहुंचानेवाला था।

इस प्रस्तुति को नव नृत्य एवं नाट्य संस्था, भोपाल द्वारा मंचित किया गया। नाटक के माध्यम से यह संदेश आया कि किसी से प्रभावित होने से बेहतर है, स्वयं ऐसा व्यक्तित्व बनना, जो समाज को प्रभावित करे। परसाई उवॉच ने यह सिद्ध कर दिया कि व्यंग्य केवल हंसी का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का एक सशक्त उपकरण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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