सूर्यदेव हुए उत्तरायण: दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी

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सूर्यदेव हुए उत्तरायण: दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी


सूर्यदेव हुए उत्तरायण: दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी


सूर्यदेव हुए उत्तरायण: दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी


सूर्यदेव हुए उत्तरायण: दो दिन तक मनेगा संक्रांति उत्सव, हजारों श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी


अनूपपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। जब सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है। वहीं नई फसल की कटाई तथा सूर्यदेव के दक्षिणायन से उत्तरायण की पौराणिक मान्यताओं में मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा व हर्षोउल्लास के आरम्भ हुआ। जिले की पवित्र नगरी अमरकंटक के नर्मदा सहित जिला मुख्यालय के सोन-तिपान नदी संगम पर श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। जबकि राजेन्द्रग्राम, कोतमा, जैतहरी, राजनगर, बिजुरी सहित अन्य क्षेत्रों से गुजरती नर्मदा, सोन, जुहिला, तिपान, केवई सहित अन्य नदियों के नदीघाटों पर लोगों ने स्नानकर इष्टदेवों की विशेष पूजा अर्चना की। मकरसंक्रांत के अवसर पर जिले के अनेक स्थानों पर मेले का भी आयोजन किया गया है। दोपहर तक हजारों श्रद्धालु अमरकंटक पहुंच कर नर्मदा में डुबकी लगा चुके हैं। शाम तक अमरकंटक में नर्मदा उद्गम में लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी लगा चुके हैं।

मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और जरूरतमंदों को दान करने से साधक के भाग्य में वृद्धि होती हैं, साथ ही वंशों पर पितरों की कृपा बनी रहती हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। यह दिन सूर्य उपासना के लिए उत्तम माना गया है। कहते हैं कि यदि सच्चे भाव से मकर संक्रांति पर सूर्यदेव को जल अर्पित किया जाए, तो जातक की कुंडली में उनकी स्थिति मजबूत होती है। वहीं भारत में मकर संक्रांति को नई फसल और खिचड़ी का पर्व भी कहते हैं, इस तिथि पर खिचड़ी बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, हालांकि कुछ राज्यों में इसे तिल संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

एक ऐसी भी मान्यता है कि इसी त्योहार पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं. सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहां से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

पर्व की पौराणिक निर्धारित तिथि की महत्ता में मकरसंक्रांत हर्षोउल्लास के साथ शुभारम्भ हुआ। आस्था, उमंग और उत्साह का पर्व मकर संक्रांति समूचे जिले में उल्लास पूर्वक मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार मकर संक्राति का पर्व बह्मा, विष्णु, महेश, गणेश सहित आदि शक्ति और सूर्य की उपासना एवं आराधना का पावन व्रत माना जाता है। संत महर्षियों के अनुसार इनके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है, संकल्प शक्ति बढ़ती है, ज्ञान का विकास होता है। मकर संक्रंति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है। जबकि अन्य मान्यताओं में गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में मिली थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा-सागर में मेला लगता है। जिले मुख्यालय से सटे ग्राम सीतापुर के साथ बरगवां में भी मेला सज चुका हैं। दोनों मेला में पुलिस सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लोग सुबह से ही दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर बरगवां में पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया।

अमरकंटक में श्रद्धालुओं की भीड़

संक्रांति पर्व पर जिले की पर्यटन एवं धार्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में मकर संक्रांति पर दूरस्थ अंचलों से आए भक्त श्रद्धालुओं तीर्थ यात्रियों ने पावन सलिल मां नर्मदा के कोटि तीर्थ घाट, गांधी कुंड, रामघाट, पुष्कर बांध के उत्तर एवं दक्षिण तट के घाट,अरंडी संगम के दोनों तटों पर डुबकी कर दर्शन कर पूजा अर्चन दर्शन किया। नर्मदा उद्गम स्थल मंदिर में लाइन लगाकर भक्त श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा का दर्शन कर पूजा अर्चन किया। इस दौरान तीर्थ यात्रियों भक्तों ने गरीब असहाय जनों को अनाज तथा तिल की बनी वस्तु का दान किया तथा कई तीर्थ यात्रियों ने खिचड़ी गरीबों को वितरित किया। अनेकों लोगों ने वस्त्र कंबल वितरित किए। मंदिर परिसर में जाने के लिए लंबी कतार मुख्य प्रवेश द्वार पर बनी हुई हैं। मंदिर के बाहर और मंदिर के अंदर दोनों तरफ हजारों लोगों की भीड़ बनी हुई है। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे हैं। दिन भर यहां लोगों के आने का सिलसिला बना हुआ है।

गोंगपा सम्मेलन में उमड़ा

संक्रांति पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी अमरकंटक में 30 वर्षो से लगातार सम्मेलन आयोजित कर रहीं हैं। अखिल गोंगपा सम्मेलन 13 जनवरी से आरम्भ हुआ, जो 15 जनवरी को समाप्त होगा। गोंडवाना समाज के लोगों के द्वारा नवोदय विद्यालय के समीप बने स्थान से 14 जनवरी को विशाल रैली जुलूस गाजे बाजे के साथ अपने पारंपरिक अस्त्र-शास्त्र विशिष्ट परिधान धारण करते हुए नगर के मुख्य मार्गो से जय घोष नारे लगाते हुए नाचते गाते झूमते महिला पुरुष भारी तादाद में शामिल होकर निकले। गोंगपा के सम्मेलन में गोंडी, धर्म, सांस्कृतिक, साहित्य सम्मेलन एवं फडापेन महापूजन समारोह आयोजित किए गए। जिसमें 13 जनवरी को युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनचेतना 14 जनवरी को गोंडी धर्म संसद, मातृ सम्मान, मातृ शक्ति महासम्मेलन, शोभायात्रा तथा 15 जनवरी को माई दर्शन और परिक्रमा जैसे कार्यक्रम सम्पन्न होंगे। इस दौरान हजारों की तादाद में प्रदेश सहित अन्य 10-12 प्रदेशों से आदिवासी परिवार सम्मेलन में पहुंचे। बताया जाता है कि इसमें दादा हीरा सिंह मरकाम (संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष जीजीपी) का जन्म दिवस मनाने तथा गोंडी धर्म पर आधारित दीक्षा समारोह का कार्यक्रम भी आयोजित कराया जाता है। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन गोंडी धर्म, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ समाज में जागरूकता एवं एकता का संदेश देता है। अमरकंटक में आयोजित यह चार दिवसीय आयोजन गोंडवाना समाज की गौरवशाली परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

अमरकंटक में विशेष सुरक्षाबलों को तैनात कर पर्यटक पुलिस चौकी को चौकसी बरतने की हिदायत दी गई है। जबकि मुख्यलाय स्थित सोन-तिपान नदी संगम घाट पर आयोजित होने वाले मेले के लिए दर्जनभर जवानों को तैनात किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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