अनूपपुर : सोन तट की रेत बनी किसानों की ताकत, ककड़ी-खीरा और तरबूज से रोज़गार को नई दिशा

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अनूपपुर : सोन तट की रेत बनी किसानों की ताकत, ककड़ी-खीरा और तरबूज से रोज़गार को नई दिशा


अनूपपुर : सोन तट की रेत बनी किसानों की ताकत, ककड़ी-खीरा और तरबूज से रोज़गार को नई दिशा


अनूपपुर, 04 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सोन नदी का तट अब किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। नदी किनारे की रेत में की जा रही मौसमी खेती ने न सिर्फ ग्रामीणों की आय बढ़ाई है, बल्कि गर्मी के कठिन महीनों को कमाई के सुनहरे अवसर में बदल दिया है।

जिले के बरबसपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में किसान रेत में ककड़ी, देसी खीरा, तरबूज और खरबूजे की खेती कर रहे हैं। नदी किनारे की नम और उपजाऊ रेत इन फसलों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रही है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन मिल रहा है। गर्मियों में इन फलों की मांग अधिक होने के कारण किसानों को बाजार में अच्छे दाम भी मिल रहे हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यह खेती उन्होंने अपने पूर्वजों से सीखी थी, लेकिन पहले सीमित स्तर पर होती थी। अब बढ़ती मांग और बेहतर मुनाफे को देखते हुए अधिक परिवार इससे जुड़ते जा रहे हैं। रोज सुबह खेतों से ताजी उपज तोड़कर किसान नजदीकी बाजारों में बेचते हैं, वहीं कई लोग सड़क किनारे अस्थायी दुकान लगाकर सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

इस खेती की खास बात यह है कि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। किसान बताते हैं कि बीज, पानी और मेहनत के सहारे तीन महीने में फसल तैयार हो जाती है। एक परिवार रोजाना 2 से 3 हजार रुपये तक कमा लेता है, जिससे घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। इसके साथ ही गांव में रोजगार के अवसर बढ़ने से पलायन में भी कमी आई है।

महिलाएं भी इस खेती में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे खेतों में काम करने के साथ-साथ बिक्री और ग्राहकों से संपर्क में भी सहयोग करती हैं, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ी है। अधिकांश किसान जैविक तरीकों से खेती कर रहे हैं, जिससे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित और स्वादिष्ट माने जा रहे हैं।

हालांकि, नदी किनारे की खेती में फसल की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। जंगली और आवारा जानवरों से बचाव के लिए किसानों ने स्थानीय जुगाड़ ‘रूधान’ तैयार किए हैं। इसके अलावा कई किसान खेतों में झोपड़ी बनाकर रातभर पहरा देते हैं, ताकि फसल को नुकसान न हो।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले गर्मी का मौसम बेरोजगारी का समय माना जाता था, लेकिन अब यही समय सबसे ज्यादा कमाई का जरिया बन गया है। सोन तट की यह खेती क्षेत्र के किसानों के लिए आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई कहानी लिख रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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