अहंकार को छोड़े बिना आत्मा का कल्याण संभव नहीं- संत श्री प्रत्यक्ष रत्नविजयजी

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अहंकार को छोड़े बिना आत्मा का कल्याण संभव नहीं- संत श्री प्रत्यक्ष रत्नविजयजी


मंदसौर, 01 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर में जीवागंज स्थित श्री राजेन्द्र विलास में चातुमासिक प्रवचनों की श्रृंखला चल रही है। प्रतिदिन प्रात: 9 से 10.15 बजे तक आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. व आचार्य श्री जयचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती शिष्य श्री प्रत्यक्षरत्नविजयजी म.सा. व श्री पवित्ररत्नविजयजी म.सा. के प्रवचन हो रहे हैं।

शनिवार को मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्नविजयजी म.सा. ने धर्मसभा (प्रवचन) में कहा कि अहंकार की भावना आपके आत्मकल्याण में सबसे बड़ी बाधा है। अहंकार को छोड़े बिना आत्मा का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने महर्षि मरीची व भरत चक्रवर्ती का वृतान्त बताते हुए कहा कि जब भरत चक्रवर्ती को यह ज्ञान हुआ कि महर्षि मरीची अगले भव में तीर्थंकर होंगे तो उन्होंने शमोशरण में उन्हें विनती पूर्वक नमन किया। ऐसा देख मरीची के मन में अहंकार की भावना आ गयी और यही अहंकार की भावना मरीची के आत्म कल्याण में बाधक बनी और वे जो तीर्थंकर बनने के योग्य थे उनकी गति बिगड़ गयी। इसलिये जीवन में अहंकार को अपने मन मस्तिष्क में स्थान नहीं देवें। आपने कहा कि जब भी आपको यश मिले, खूब भौतिक सुखसुविधा मिले उसे देव गुरु धर्म की कृपा माने। कभी भी अहंकार मत करो अन्यथा आपकी गति अगले भव में बिगड़ना तय है। आपने कहा कि जैन भगवती सूत्र में भगवान महावीर से गौतम स्वामी ने 36 हजार प्रश्न पूछे प्रभु ने उनका उत्तर दिया यह उत्तर केवल उनके लिये नहीं हमारी आत्मा के कल्याण के मन्त्र हैं हम इसे समझने की कोशिश करें।

व्याख्यान में अनुशासन, विनम्रता रखना जरुरी - जैन आगमों में श्रावक श्राविकाओं की व्याख्यान के दौरान क्या क्या अनुशासन, विनम्रता रखना है यह सब बताया गया है। कतारबद्ध होकर बैठें, विनय पूर्वक जिनवाणी सुनें, अनावश्यक नहीं बोलें अनुशासन बनाये रखें। व्याख्यान के दौरान श्रवण करायी जा रही वाणी को आत्मसात् करें तथा उसका रिवीजन करें। प्रवचन श्रवण का उद्देश्य दिखावा नहीं आत्म कल्याण होना चाहिये। जब भी प्रवचन में बैठें घर परिवार, दुकान की चिन्ता छोड़ दो। धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं भी उपस्थित थे। प्रभावना मोहनलालजी अशोक कुमारजी चपरोत परिवार के द्वारा वितरित हुई।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

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