एरण महोत्सव 2026: बीना के ऐतिहासिक गुप्तकालीन मंदिर परिसर में गूंजेंगे लोक संस्कृति के सुर
सागर, 09 जनवरी (हि.स.)। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरा और गुप्तकालीन वैभव के प्रतीक एरण में एक बार फिर लोक कलाओं का संगम होने जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा बीना स्थित एरण के ऐतिहासिक नरसिम्हा मंदिर परिसर में 14 से 16 जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय 'एरण महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य एरण के ऐतिहासिक महत्व और यहाँ के गुप्तकालीन मंदिरों का लोक व्यापीकरण करना है। तीन दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक महाकुंभ में लोक एवं जनजातीय कलाओं की रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा
महोत्सव में मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवा और स्थापित कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम का विवरण इस प्रकार है:
प्रथम दिवस: 14 जनवरी, 2026 (बुधवार)
महोत्सव का आगाज बुंदेलखंड की माटी की खुशबू के साथ होगा।
* राई नृत्य: गोविंद सिंह यादव एवं साथियों (गंजबासौदा) द्वारा मनमोहक प्रस्तुति।
* बधाई नृत्य: जितेन्द्र श्रीवास्तव एवं टीम (सागर) द्वारा मंगल ध्वनि पर नृत्य।
* नाट्य प्रस्तुति: दीपशिखा मंच, दतिया द्वारा बुंदेलखंड के शौर्य के प्रतीक हरदौल नाटक का मंचन।
* भजन गायन: मशहूर भजन गायिका शहनाज अख्तर (सिवनी) अपनी सुमधुर आवाज से समां बांधेंगी।
द्वितीय दिवस: 15 जनवरी, 2026 (गुरुवार)
* भजन गायन: दशरथलाल पारोची (गुना) द्वारा भक्तिमय प्रस्तुति।
* लोकगायन: नीलम राजपूत एवं साथी (छतरपुर) की सुरीली प्रस्तुतियां।
* नृत्य नाटिका: नवधा कथकालय (भोपाल) के कलाकारों द्वारा विशेष प्रस्तुति।
* ढिमरयाई नृत्य: परमानंद केवट एवं साथी (सिसेंज) द्वारा पारंपरिक नृत्य।
* लोकगायन: बुंदेली गायकी के चर्चित कलाकार जित्तू खरे 'बादल' एवं साथी (सागर) द्वारा विशेष प्रस्तुति।
तृतीय दिवस: 16 जनवरी, 2026 (शुक्रवार)
समापन अवसर पर विभिन्न अंचलों की विविधता देखने को मिलेगी।
* चकरी नृत्य: ममता देवी एवं साथियों द्वारा राजस्थान की प्रसिद्ध लोक संस्कृति का प्रदर्शन।
* मालवी लोकनृत्य: विनती जैन एवं टीम (उज्जैन) द्वारा मालवा की कला का प्रदर्शन।
* लोकगायन: अर्चना कोटार्य एवं साथी (झांसी) द्वारा प्रस्तुतियां।
* भजन गायन: सुप्रसिद्ध लोक गायिका संजो बघेल एवं ग्रुप (जबलपुर) द्वारा भजनों की प्रस्तुति।
पर्यटन और इतिहास का संगम
एरण
न केवल एक पुरातात्विक स्थल है, बल्कि यह भारतीय इतिहास के स्वर्ण युग यानी गुप्त काल का साक्षी भी है। यहाँ स्थित भगवान विष्णु के अवतार वराह की विशाल प्रतिमा और नरसिम्हा मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। शासन के इस प्रयास से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने और युवाओं को अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार/मनीष कुमार चौबे
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

