सकारात्मक पत्रकारिता ही श्रेष्ठ समाज की आधारशिला: बीके उर्मिला

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सकारात्मक पत्रकारिता ही श्रेष्ठ समाज की आधारशिला: बीके उर्मिला


मंदसौर, 14 जुलाई (हि.स.)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के आत्म कल्याण भवन एवं मीडिया प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया’ विषय पर मीडिया सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में माउंट आबू से आईं ब्रह्माकुमारी संस्था की ‘ज्ञानामृत’ पत्रिका की संपादक बीके उर्मिला ने कहा कि मीडिया की कलम केवल समाचार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव, विश्वास और सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम भी है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को ऐसी खबरें और विचार प्रस्तुत करने चाहिए, जो लोगों में सकारात्मक सोच, निर्भयता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करें। उनके अनुसार पत्रकारिता की वास्तविक शक्ति तभी सार्थक होती है, जब उसमें सत्य, संवेदनशीलता और ईमानदारी का समावेश हो।

बीके उर्मिला ने कहा कि भारत का प्राचीन संदेश ‘ओम शांति’ केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सकारात्मक दिशा है। जब व्यक्ति अपने विचार, व्यवहार और कर्म में शांति को अपनाता है, तब उसके जीवन और समाज दोनों में सकारात्मक बदलाव दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि निर्भयता प्रत्येक व्यक्ति का मूल गुण है। भयमुक्त व्यक्ति ही अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकता है और समाज व राष्ट्र के निर्माण में सार्थक भूमिका निभा सकता है। पत्रकारिता में भी कथनी और करनी का एक होना आवश्यक है, क्योंकि सत्य और निष्पक्षता से लिखे गए शब्द समाज पर स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं।

उन्होंने मीडिया जगत की वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा और व्यावसायिक दबाव के बावजूद पत्रकारों को सामाजिक सरोकार और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए। नकारात्मक घटनाओं की जानकारी देना आवश्यक है, लेकिन उनके समाधान, प्रेरक पहल और रचनात्मक प्रयासों को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

मेडिटेशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के लिए उपयोगी है। मेडिटेशन मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है, तनाव कम करता है और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने से अधिक चुनौती उसे बनाए रखने की होती है, जिसके लिए मानसिक शांति और आत्मिक शक्ति जरूरी है।

कार्यक्रम की शुरुआत आत्म कल्याण भवन की संचालिका बीके उषा के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि यदि मीडिया सकारात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करे तो वह श्रेष्ठ समाज और बेहतर विश्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सेमिनार का संचालन श्रीपाल भाई ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता तथा ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

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