उत्तर और पूर्वोत्तर के बीच बनी मानसिक दूरी दूर करने में मीडिया की अहम भूमिका : डॉ. समुद्र गुप्ता कश्यप
भोपाल, 16 सितंबर (हि.स.)। उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच भौगोलिक दूरी से ज्यादा महत्वपूर्ण मानसिक दूरी है। दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच एक-दूसरे को समझने और जानने की कमी को दूर करने की जरूरत है। इस दिशा में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह बात माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में
नागालैंड विश्वविद्यालय के चांसलर एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. समुद्र गुप्ता कश्यप ने बुधवार को दूरदर्शन की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में कही।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. कश्यप ने “जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्ते...” के उल्लेख के साथ की। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों की भाषाएं, संस्कृतियां और जीवनशैलियां भले ही अलग हों, लेकिन सभी एक ही भारत का हिस्सा हैं। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत और शेष देश के बीच मौजूद दूरी को समझने और उसे कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेष व्याख्यान के दौरान डॉ. कश्यप ने विद्यार्थियों से पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर खबर तैयार करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक है। इसके साथ ही पत्रकार को संबंधित विषय के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ की भी जानकारी होनी चाहिए। केवल घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी जुटा लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विषय की वास्तविकता को समझने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना जरूरी है।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में अपने पत्रकारिता अनुभवों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, शोध और सवाल पूछने की आदत विकसित करने की सलाह दी। डॉ. कश्यप ने कहा कि पत्रकारिता में तकनीकी दक्षता के साथ तथ्यपरक दृष्टिकोण, विश्वसनीयता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति भी महत्वपूर्ण है।
संवाद सत्र में एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर की छात्रा तनुश्री गुप्ता ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और निजी समाचार चैनलों के बढ़ते प्रभाव के बीच दूरदर्शन की वर्तमान प्रासंगिकता को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि आज के समय में दूरदर्शन को पहले की तुलना में कम देखे जाने के बावजूद उसकी भूमिका किस रूप में बनी हुई है।
इस पर डॉ. कश्यप ने कहा कि दूरदर्शन की विश्वसनीयता कम नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन सरकार के अंतर्गत आता है, इसलिए उसके सामने कुछ विशेष जिम्मेदारियां भी हैं। जब दर्शकों को विश्वसनीय और तथ्यपरक समाचार की आवश्यकता होती है, तब दूरदर्शन आज भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बदलते मीडिया परिदृश्य में भी विश्वसनीय सूचना उपलब्ध कराने की उसकी भूमिका बनी हुई है।
एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर की छात्रा ज्योति शुक्ला ने नॉर्थ ईस्ट और नॉर्थ इंडिया की मीडिया के बीच अंतर तथा पूर्वोत्तर के लोगों के मुख्यधारा के मीडिया में कम प्रतिनिधित्व को लेकर प्रश्न किया। उन्होंने पूछा कि पूर्वोत्तर भारत के लोग राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर अपेक्षाकृत कम दिखाई क्यों देते हैं और दोनों क्षेत्रों के मीडिया संस्थानों के कामकाज में क्या अंतर है।
जवाब में डॉ. कश्यप ने उत्तर और पूर्वोत्तर के बीच बने ‘माइंड ब्लॉक’ तथा आपसी दूरी को महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे को पर्याप्त रूप से समझ नहीं पाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब उत्तर भारत के लोगों से पूछा जाता है कि उन्होंने पूर्वोत्तर के राज्यों का दौरा किया है या नहीं, तो कई बार उनका जवाब होता है कि वह क्षेत्र बहुत दूर है। इसी तरह पूर्वोत्तर के लोगों में भी उत्तर भारत को लेकर दूरी बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय और राज्य स्तरीय मीडिया संस्थान अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ाने की आवश्यकता है। मीडिया इस दूरी को कम करने और देश के विभिन्न हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पत्रकारिता, मीडिया की विश्वसनीयता और पूर्वोत्तर भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े अन्य प्रश्न भी पूछे। डॉ. कश्यप ने अपने अनुभवों के आधार पर उनके उत्तर दिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता में निरंतर सीखते रहना और तथ्यों को समझना आवश्यक है।
इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मोनिका वर्मा और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजीव गुप्ता ने पुस्तक भेंट कर डॉ. समुद्र गुप्ता कश्यप का स्वागत किया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, एमएसी तृतीय सेमेस्टर, एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर और बीएससी पांचवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

