परमाणु ऊर्जा की सही जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका : विशेषज्ञ

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परमाणु ऊर्जा की सही जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका : विशेषज्ञ


भोपाल, 17 अगस्त (हि.स.)। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सोमवार को परमाणु ऊर्जा तकनीक और मास मीडिया के बीच समन्वय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग ने इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी, मुंबई के सहयोग से लता मंगेशकर सभागार में ‘परमाणु ऊर्जा तकनीक की सफलता में मास मीडिया की भूमिका’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया।

कार्यक्रम में इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के अध्यक्ष वी.के. मनचंदा मुख्य अतिथि रहे। प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं एनपीसीआईएल के सेवानिवृत्त एसोसिएट डायरेक्टर अनादि कुमार सिन्हा, ओ.पी. राय, डॉ. अर्चना मिश्रा और डॉ. ऋषिकेश मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी की ओर से विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी, कुलसचिव पी. शशिकला, डीन अकादमिक डॉ. मनीष माहेश्वरी और विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव का प्रतीक चिह्न एवं शॉल भेंट कर सम्मान किया गया।

विज्ञान और मीडिया के बीच समन्वय जरूरीकुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय लंबे समय तक मीडिया की प्राथमिकताओं से अपेक्षाकृत दूर रहे हैं। विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों को गहराई से समझने की जरूरत है। उन्होंने छात्रों से अतीत में उलझे रहने के बजाय भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।

इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के अध्यक्ष वी.के. मनचंदा ने कहा कि परमाणु ऊर्जा को लेकर समाज में व्याप्त आशंकाओं और भ्रम को दूर करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने जे.आर.डी. टाटा का स्मरण करते हुए बताया कि वर्ष 1988 में इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के उद्घाटन के दौरान टाटा ने परमाणु क्षेत्र में कार्य को और पहले शुरू किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी जनमानस तक पहुंचाना जरूरी है।

कृषि क्षेत्र में परमाणु तकनीक के उपयोग की जानकारीभाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. अर्चना मिश्रा ने परमाणु तकनीक के कृषि क्षेत्र में उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परमाणु विकिरण का उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। परमाणु तकनीक के माध्यम से फसलों की उन्नत किस्में विकसित करने और कृषि उत्पादों की भंडारण क्षमता बढ़ाने में भी सफलता मिली है।

उन्होंने बताया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र अब तक फसलों की 72 उन्नत किस्में विकसित कर चुका है। इनमें मूंगफली की टीएजी-24 किस्म और देश की पहली म्यूटेंट केले की किस्म ‘कावेरी बामन’ भी शामिल है। विकिरण तकनीक के माध्यम से प्याज और आलू के अंकुरण को नियंत्रित कर उनकी भंडारण अवधि को आठ माह तक बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से आम के निर्यात को भी बढ़ावा मिला है और भारतीय आम अमेरिका तक पहुंच रहे हैं।

परमाणु ईंधन चक्र और 100 गीगावाट का लक्ष्यडॉ. ऋषिकेश मिश्रा ने ‘न्यूक्लियर फ्यूल साइकल : वेल्थ फ्रॉम न्यूक्लियर वेस्ट’ विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने परमाणु ईंधन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं की जानकारी देते हुए फ्रंट एंड, रिएक्टर और बैक एंड की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने येलो केक से लेकर रिएक्टर और प्रयुक्त ईंधन के भंडारण तक की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में 8.8 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित कर रहा है और इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

सफलता के लिए सकारात्मक सोच और प्रभावी संवाद जरूरीप्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं प्रेरक वक्ता अनादि कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए सफलता और जीवन कौशल से जुड़े महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए। उन्होंने विभिन्न रोचक कहानियों के माध्यम से सकारात्मक सोच, टीम भावना और निरंतर प्रयास का महत्व समझाया। उन्होंने प्रभावी संचार और समय प्रबंधन को सफलता के लिए आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को मोबाइल फोन और इंटरनेट के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी।

ओ.पी. राय ने इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के इतिहास और गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था की स्थापना जनवरी 1988 में जे.आर.डी. टाटा के नेतृत्व में हुई थी। वर्तमान में संस्था के 5,600 से अधिक सदस्य हैं। अमेरिकन, फ्रेंच और जापानी न्यूक्लियर सोसाइटी के साथ भी इसके समझौते हैं। उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों को विदेश में परमाणु अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराने वाली आईएनएस एफटीजीएस छात्रवृत्ति की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका सक्सेना ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने कहा कि यह संभवतः पहला अवसर है, जब परमाणु क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के मंच पर विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने पहुंचे हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और प्रोफेसर उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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