अनूपपुर: यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों के लिए सामाजिक समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना- बुधपाल सिंह

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अनूपपुर: यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों के लिए सामाजिक समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना- बुधपाल सिंह


अनूपपुर, 17 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में बुधवार को बैठक में यूसीसी के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य बुधपाल सिंह ने संहिता के प्रावधानों के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में निहित है, जिसका एकमात्र उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए सामाजिक समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है।

उन्होंने इसके ऐतिहासिक संदर्भों को रेखांकित करते हुए बताया कि गोवा में यह व्यवस्था आजादी के पूर्व से ही प्रभावी रूप से लागू है। वर्तमान में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों के बाद मध्यप्रदेश भी इसे लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसा करने वाला यह देश का चौथा राज्य होगा। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से संहिता को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए सुझाव एवं विचार प्राप्त किए गए।

समिति सदस्य ने समाज के विभिन्न वर्गों की आशंकाओं और संशयों को दूर करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में जनजातीय समुदाय की विशिष्ट परंपराओं, संस्कृति और रीति-रिवाजों का पूरा सम्मान किया गया है, जिसके चलते अनुसूचित जनजातियों को इस संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि यूसीसी के लागू होने से किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक गतिविधियों या नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई आंच नहीं आएगी, क्योंकि यह कानून केवल सामाजिक और नागरिक सुधारों तक ही सीमित है।

वर्तमान कानूनी विसंगतियों पर चर्चा करते हुए बुधपाल सिंह ने बताया कि अभी विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण (गोद लेना) और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के अधीन आते हैं। यूसीसी का मुख्य उद्देश्य इन सभी विषयों पर एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं को समाज में पुरुषों के समकक्ष समान अधिकार मिल सकें। संहिता के लागू होने से विवाह का अनिवार्य पंजीकरण होगा, बेटे-बेटी को पैतृक संपत्ति में बराबर का हक मिलेगा, गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष होगी और बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।

इस विचार-विमर्श सत्र में उपस्थित नागरिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे। वक्ताओं ने विशेष रूप से विवाह की आयु, भरण-पोषण की राशि और लिव-इन रिलेशनशिप के नियमन के लिए बनाए जाने वाले प्रावधानों में पूर्ण स्पष्टता रखने पर जोर दिया। इसके साथ ही, आमजन तक इस कानून की सही जानकारी पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव भी दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के भ्रम या अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।

बैठक में जिला पंचायत सदस्य रंजीत सर्राटी, नगर पालिका परिषद अनूपपुर की उपाध्यक्ष सोनाली तिवारी, नगर परिषद डूमर कछार के अध्यक्ष सुनील कुमार चौरसिया, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संतोष परिहार, सामाजिक कार्यकर्ता सुशील शर्मा, विजय सिंह, निखिल कुमार, मुकेश गौतम, राकेश द्विवेदी सहित अन्य गणमन नागरिकों ने भी समान नागरिक संहिता के संबंध में सुझाव दिए।

कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बताया कि शासन स्तर पर गठित यह उच्च स्तरीय समिति प्रत्येक जिले में जाकर नागरिकों से सीधा संवाद कर रही है। उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों, सामुदायिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे आने वाले अंतिम पांच दिनों में इस प्रक्रिया को एक व्यापक 'जन आंदोलन' का रूप दें। जो लोग आज बैठक में शामिल नहीं हो सके, वे आधिकारिक पोर्टल ucc.mp.gov.in के माध्यम से अपने ऑनलाइन सुझाव दर्ज कराएं, ताकि समाज के हर वर्ग के विचारों को समाहित करते हुए एक सर्वसमावेशी और न्यायसंगत फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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