उमरिया : जिला जेल में मनाया गया रक्षाबंधन, बहनों ने बंदी भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र

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उमरिया : जिला जेल में मनाया गया रक्षाबंधन, बहनों ने बंदी भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र


उमरिया, 28 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जिला जेल उमरिया में भावुक और आत्मीय माहौल देखने को मिला। अलग-अलग मामलों में निरुद्ध बंदियों से मिलने उनकी बहनें जेल पहुंचीं और भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके बेहतर भविष्य की कामना की। बहनों ने भाइयों से संकल्प लिया कि वे भविष्य में ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे, जिससे उन्हें दोबारा जेल आना पड़े और परिवार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़े।

राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला जेल में बंदी भाइयों को राखी बंधवाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचीं बहनों ने अपने भाइयों को तिलक लगाया, राखी बांधी और मिठाई खिलाकर उनके स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

भाइयों से दोबारा अपराध न करने की अपील

मानपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम भमरहा से अपने भाई को राखी बांधने पहुंची ममता मिश्रा ने बताया कि उनके भाई करीब एक वर्ष से जेल में बंद हैं। रक्षाबंधन पर वह उनसे मिलने और राखी बांधने आई हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने भाई से यही उम्मीद करती हैं कि भविष्य में ऐसा कोई काम न करें, जिसके कारण उन्हें दोबारा जेल आना पड़े।

उन्होंने कहा कि परिवार के लिए किसी अपने का जेल में होना बेहद पीड़ादायक होता है। इसलिए राखी बांधते समय उन्होंने भाई से अच्छे रास्ते पर चलने और भविष्य में किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं होने का संकल्प लिया।

201 बंदी निरुद्ध

जिला जेल के प्रभारी जेलर माखन सिंह मार्को ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार रक्षाबंधन के अवसर पर बंदी भाइयों को बहनों से राखी बंधवाने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में बहनें जेल पहुंचकर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला जेल उमरिया में कुल 201 बंदी निरुद्ध हैं, जिनमें 197 पुरुष और चार महिला बंदी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि जेल में आने वाली बहनों के लिए पेयजल, कैंटीन से मिठाई तथा चलित शौचालय सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। सभी बहनों को उनके भाइयों से मुलाकात कराकर राखी बंधवाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

रक्षाबंधन के इस आयोजन ने बंदियों और उनके परिजनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत किया। बहनों ने भाइयों को राखी बांधते हुए उनसे अपराध की राह छोड़कर समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदार जीवन जीने की अपेक्षा जताई।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी

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