सागर: फाइलों से निकलकर पगडंडियों तक, जब 'हाई रिस्क' गर्भवती महिला का हाल जानने खुद घर पहुँचे कलेक्टर

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सागर: फाइलों से निकलकर पगडंडियों तक, जब 'हाई रिस्क' गर्भवती महिला का हाल जानने खुद घर पहुँचे कलेक्टर


सागर, 14 जनवरी (हि.स.)। अक्सर सरकारी दौरों में सड़कों की गुणवत्ता और दफ्तर की फाइलों का हिसाब-किताब देखा जाता है, लेकिन मप्र के सागर कलेक्टर संदीप जीआर ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई परिभाषा लिखी है। रहली विकासखंड के ग्राम पिपरिया नरसिंह में कलेक्टर ने न केवल प्रोटोकॉल तोड़ा, बल्कि एक 'हाई रिस्क' गर्भवती माता के घर पहुँचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।

एक अधिकारी नहीं, 'बड़े भाई' की भूमिका में नजर आए कलेक्टर

क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान जब कलेक्टर संदीप जीआर को 'हाई रिस्क' गर्भवती महिला कीर्ति गोंड के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने अपना काफिला रुकवाया और संकरी पगडंडियों से होते हुए उनके घर जा पहुँचे। वहां पहुँचकर कलेक्टर ने किसी सख्त अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि परिवार के एक बड़े भाई और अभिभावक की तरह कीर्ति से संवाद किया।

उन्होंने बारीकी से स्वास्थ्य कार्ड (Health Card) की जांच की और आत्मीयता से पूछा— भोजन में फल और दूध ले रही हो न? डॉक्टर ने जो दवाएं दी हैं, उन्हें समय पर खाना। कलेक्टर की इस सहजता ने परिवार के डर को आश्वस्तता में बदल दिया।

बेटियां ही घर की असली शान: नन्ही बिटिया पर लुटाया दुलार

इस मुलाकात के दौरान एक भावुक पल तब आया जब कीर्ति की पहली छोटी बेटी पास आकर खड़ी हो गई।

कलेक्टर ने तुरंत उसे गोद में उठा लिया, दुलार किया और उसे चॉकलेट भेंट की।

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक बड़ा सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि:बेटियां घर की रौनक, मान और असली शान होती हैं। उनका सुरक्षित जन्म और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना केवल परिवार की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

हिन्‍दुस्‍थान समाचार/मनीष कुमार चौबे

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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