सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक गूंजा हर-हर महादेव, दिव्यांग ने ट्राइसिकल पर 11 किमी की कांवड़ यात्रा की

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सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक गूंजा हर-हर महादेव, दिव्यांग ने ट्राइसिकल पर 11 किमी की कांवड़ यात्रा की


सीहोर, 20 अगस्त (हि.स.)। सावन माह में मध्य प्रदेश के सीहोर की सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक गुरुवार को शिवभक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु कंधों पर कांवड़ उठाकर पवित्र जल लेकर भगवान शिव के धाम की ओर बढ़ते नजर आए। इसी भीड़ में छत्तीसगढ़ के दिव्यांग श्रद्धालु राजेश ने ट्राइसिकल पर कांवड़ लेकर करीब 11 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। उनका उत्साह और आस्था राह से गुजर रहे लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।

राजेश ने बताया कि वह लगातार तीन वर्षों से सीवन नदी से पवित्र जल लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस वर्ष भी वह अपने साथियों के साथ वाहन से ट्राइसिकल लेकर सीहोर पहुंचे और सीवन नदी के तट से कांवड़ यात्रा शुरू की।

उन्होंने बताया कि कुछ वर्ष पहले उनके परिवार में गृहक्लेश का माहौल था और उनका बेटा नशे की गिरफ्त में था। परिवार में शिव महापुराण का श्रवण और भगवान शिव की भक्ति शुरू करने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया और अब घर में शांति एवं सद्भाव का वातावरण है। राजेश का कहना है कि भगवान शिव के प्रति विश्वास उन्हें आत्मिक शक्ति देता है और इसी आस्था के कारण वह हर वर्ष कांवड़ लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंचते हैं।

दिव्यांग कांवड़ यात्री का किया सम्मानराजेश की अटूट आस्था और उत्साह को देखते हुए विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सदस्यों ने उनका स्वागत और सम्मान किया। छत्तीसगढ़ से उनके साथ आए श्रद्धालुओं ने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की कथाओं से प्रेरित होकर नशे जैसी बुराइयों से दूर हो रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ रहे हैं।

इसी कांवड़ यात्रा में एक अन्य श्रद्धालु भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। 13 वर्षीय बड़ा भाई अपने तीन वर्षीय छोटे भाई को गोद में लेकर कंधे पर कांवड़ उठाए कुबेरेश्वरधाम तक पहुंचा।

भाव से की गई शिव आराधना देती है सकारात्मक दिशाकथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ सच्चे भाव से की गई भक्ति से प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को महादेव इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे सभी देवी-देवताओं के सृजनकर्ता हैं। महादेव की आराधना से सभी देवी-देवताओं की पूजा का फल प्राप्त होता है।

उन्होंने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की महिमा बताते हुए कहा कि उनका एक स्वरूप आशुतोष है। भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने के कारण भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है। आशुतोष की आराधना से मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। वहीं संहार शक्ति के कारण शिव का एक स्वरूप रुद्र भी है। उन्होंने कहा कि शिव आराधना व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति देने के साथ जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।

अंतिम सोमवार के बाद 25 अगस्त को निकलेगी भव्य कांवड़ यात्राविठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि सावन माह के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कुबेरेश्वरधाम पहुंच रहे हैं। 24 अगस्त को सावन का अंतिम सोमवार होने के कारण रविवार, सोमवार और मंगलवार को लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं ने सीहोर शहर और आसपास के होटल, धर्मशालाओं तथा होम स्टे में पहले से बुकिंग कराई है।

उन्होंने बताया कि 25 अगस्त को सीवन नदी के तट से कुबेरेश्वरधाम तक भव्य कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा को लेकर शहर से लेकर पूरे मार्ग तक धार्मिक उत्साह का माहौल है। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विभिन्न स्थानों पर सेवा स्टॉल भी लगाए जा रहे हैं।

सावन भगवान शिव को समर्पित माह माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त पवित्र नदियों से जल लेकर कांवड़ के माध्यम से भगवान शिव को अर्पित करते हैं। आस्था, सेवा और भक्ति से जुड़ी यह यात्रा अब सीहोर और कुबेरेश्वरधाम की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

कांवड़ यात्रा से बाजारों में भी बढ़ी रौनकसावन और कांवड़ यात्रा के चलते सीहोर के बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। भगवा वस्त्र, भगवान महादेव की तस्वीरों वाली टी-शर्ट, कांवड़ सजाने की सामग्री और पूजा सामग्री की मांग बढ़ी है। कांवड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या से दुकानदारों के कारोबार में भी तेजी देखने को मिल रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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