मप्र के 'वझर' में सुरक्षित है सदियों पुराना 'सहस्त्रलिंगी शिवलिंग'
बड़वानी/निवाली, 07 जनवरी (हि.स.)। आगामी 17 जनवरी का दिन भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित 'विराट रामायण मंदिर' में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना होने जा रही है। एक ओर जहाँ आधुनिक भारत अपनी भव्यता का परिचय दे रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का एक छोटा सा गाँव 'वझर' अपनी प्राचीन पुरातात्विक विरासत के कारण इस चर्चा का केंद्र बन गया है।
बिहार का 'विराट' गौरव:
210 टन वजनी काले पत्थर का चमत्कार
तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लगभग 2500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर यह विशाल शिवलिंग बिहार पहुँच चुका है। 96 पहियों वाले विशेष ट्रक के माध्यम से लाए गए इस शिवलिंग की भव्यता देखते ही बनती है।
शिवलिंग की कुल ऊंचाई 33 फीट है और वजन 210 टन है। इसे एक ही ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इस विशाल शिवलिंग पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट बनाते हैं। बताया जा रहा है कि 120 एकड़ में फैला यह विराट रामायण मंदिर वर्ष 2030 तक पूर्ण रूप से बनकर तैयार होगा।
निवाली के 'वझर' में सुरक्षित है:
1500 वर्ष पुरानी विरासत
बिहार में स्थापित होने वाले इस शिवलिंग की समानता मप्र के बड़वानी जिले के निवाली से महज 5 किमी दूर स्थित प्राचीन पुरातात्विक गाँव वझर में देखने को मिलती है। यहाँ भी एक अद्भुत 'सहस्त्रलिंगी शिवलिंग' विराजमान है, जो परमार कालीन संस्कृति का जीवंत प्रमाण है।
वझर शिवलिंग की विशेषताएं और इतिहास:
यह शिवलिंग और यहाँ के मंदिरों के अवशेष लगभग 1500 वर्ष पुराने बताए जाते हैं। काले पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग की ऊंचाई और व्यास लगभग 4-4 फीट है, जिस पर सूक्ष्मता से 1008 शिवलिंग उकेरे गए हैं।
समाजसेवी चतरसिंह सोलंकी बताते हैं कि 1980 में एनएसएस (NSS) कैंप के दौरान खुदाई में यहाँ से दो सहस्त्रलिंगी शिवलिंग सहित करीब 200 खंडित मूर्तियाँ और विशाल जलाधारी प्राप्त हुई थीं। किसी समय चोरी के प्रयास के दौरान यह शिवलिंग गिरकर खंडित हो गया था, जिसे बाद में ग्रामीणों द्वारा सीमेंट से जोड़ा गया।
पर्यटन और आस्था का केंद्र :
वझर गाँव में वर्तमान में एक संग्रहालय भी है जहाँ पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित मूर्तियाँ रखी गई हैं। यहाँ हनुमान जी की लगभग 7 फीट ऊंची प्राचीन और चमत्कारी प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र है। तात्कालिक बड़वानी स्टेट के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
एक तरफ बिहार का नया कीर्तिमान और दूसरी तरफ वझर की सदियों पुरानी धरोहर, दोनों ही स्थान भारत की 'सहस्त्रलिंगी' शिव परंपरा के अनुपम उदाहरण हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनील सोनी
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

