चरक अस्पताल में व्यवस्थाएं  पूरी तरह चरमरा गई.......!

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चरक अस्पताल में व्यवस्थाएं  पूरी तरह चरमरा गई.......!


उज्जैन, 12 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन के चरक अस्पताल में गुरूवार को भी रोजाना की तरह मन की चल रही थी। व्यवस्थाएं चरमराई हुई थी वहीं सिविल सर्जन अपने घेरे में रोजाना की तरह घिरी हुई थी। मरीज और परिजन रोजाना की तरह परेशान हो रहे थे। इस बीच कलेक्टर रौशनकुमार सिंह अचानक से निरीक्षण करने पहुंच गए।

कलेक्टर के आने की सूचना से चरक भवन में भूकम्प जैसा आ गया। हालात यह रहे कि मोबाइल फोन पर हर दूसरा कर्मचारी अपने साथी को सूचना देते मिला और कहते दिखा-कहां हो, जल्दी आ जाओ,कलेक्टर आए हैं निरीक्षण करने। सभी मंजिलों पर तुरत-फुरत स्टॉफ पहुंच गया। हालांकि चार चिकित्सकों तक उक्त सूचना नहीं पहुंच सकी और कलेक्टर ने चारों को अनुपस्थित करते हुए वेतन काटने के निर्देश दिए। मौके पर कतिपय अधिकारी बगले झांकने के साथ बात कों इधर-उधर घुमाते दिखे।

संभाग के सबसे बड़े शासकीय जिला अस्पताल जोकि इस समय चरक भवन में संचालित हो रहा है,लम्बे समय से यह शिकायतें आम है कि अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाएं संभालने में अक्षम साबित हो रहा है। यह आरोप भी हैं कि अस्पताल में चिकित्सकों से लेकर कर्मचारियों तक के कतिपय गुट बन गए हैं। एक दूसरे को निपटाने के कथित चक्कर में व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। अनियमितता के आरोप भी गूंजते रहते हैं।

ये सारी बातें कलेक्टर रौशनकुमार सिंह तक भी पहुंची। इसी के चलते गुरूवार को वे अचानक चरक भवन पहुंचे और निरीक्षण करने लगे। जब मौके पर अनियमितताएं मिली तो उन्होने संबंधितों को टोका भी और जवाब भी मांगा। उपस्थिति रजिस्टर में चार चिकित्सकों के हस्ताक्षर नहीं मिले। इनकी अनुपस्थिति भी इंगित नहीं की गई थी। इस पर भी कलेक्टर नाराज हुए और चारों के वेतन काटने के निर्देश सिविल सर्जन डॉ.संगीता पलसानिया को दिए। कलेक्टर ने सुरक्षा में चूक दिखाई देने पर संबंधित सिक्युरिटी एजेंसी पर 50 हजार रू. का जुर्माना किया।

करीब एक घण्टे तक अस्पताल का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने मौके पर ओपीडी देखी और मरीजों तथा उनके परिजनों से व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की। इसीप्रकार आपातकालीन कक्ष में जाकर व्यवस्थाएं देखी। वहीं वार्डो में जाकर सफाई से लेकर उपस्थित पेरा मेडिकल एवं अन्य स्टॉफ तथा चिकित्सकों की उपस्थिति जांची तथा उनके काम को परखा। सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि ड्यूटी रोस्टर को व्यवस्थित करे। चिकित्सकों का एक ही उपस्थिति रजिस्टर रखें। उन्होंने कहाकि मरीजों के भर्ती होने पर उनके परिजनों को टोकन जारी करे और टोकन व्यवस्था अनुसार परिजनों को जाने दें। वार्डो में अनावश्यक शोर,भीड़ आदि न करने दें।

इनका कहना है...

आकस्मिक निरीक्षण को लेकर कलेक्टर रोशनकुमार सिंह ने चर्चा में कहाकि आकस्मिक निरीक्षण में मौके पर अनियमितताएं पाई गई है। संबंधितों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। लिफ्ट के लिए टोकन दिए जाएंगे ताकि गर्भवती और हड्डी रोग के मरीजों को अधिक समय तक लिफ्ट का इंतजार न करना पड़े। वार्डो में भी मरीजों के परिजनों को टोकन देने को कहा है। ताकि वार्डो में भीड़ न हो। ओपीडी में अनुपस्थित चार चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। सिक्युरिटी एजेंसी पर जुर्माना लगाया है। अव्यवस्थाएं पाई जाने पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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