बेलगाम होते खनन माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम रहा प्रशासन...अब जागी उम्मीद

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बेलगाम होते खनन माफिया पर लगाम लगाने में नाकाम रहा प्रशासन...अब जागी उम्मीद


मुरैना, 10 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के चंबल के मुरैना जिले में सत्ता का लवादा ओढ़े खनन माफिया बेलगाम होता जा रहा है। पिछले सालों की घटनाओं पर नजर डाले तो वन और पुलिस कर्मियों पर हमले की एक सैकड़ा से अधिक वारदातें सामने आ चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन ने खनन माफिया की नाक में नकेल डालने की कोई योजना तैयार नहीं कर पाई। यहां पर एक आईपीएस अधिकारी को भी 14 साल पहले माफिया कुचल कर मार चुका है।

हाल ही वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या के बाद जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने स्वता संज्ञान लिया है उससे एक बार न्याय की उम्मीद जागी है। यहां पर बता दें कि जिले में पांच सैकड़ा से अधिक खनन माफिया सक्रिय है जो कार्रवाई से बचने के लिए सत्ता की चादर ओढ़े नजर आ रहे है। हर एक माफिया किसी न किसी ओहदेदार के संरक्षण में है। बहती गंगा में प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी हाथ धोने से नहीं चूक रहे।

दिमनी में बुधवार सुबह अवैध रेत उत्खनन माफिया द्वारा एक वनरक्षक (हरिकेश गुर्जर) को ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर मार दिए जाने की घटना ने एक बार इस मुद्दे पटल पर ला दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए स्वता संज्ञान में लिया है। घटना पर अगले सप्ताह 13 अप्रैल को सुनवाई करने की सहमति दी है। इस मामले में मप्र सरकार का नोटिस भी जारी किया गया है,ऐसी घटनाओं के बारे में हालफनामा मांगा है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले को राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में रेत का अवैध खनन और जलीय जीवों के खतरे से जुड़े स्वता संज्ञान केस के साथ जोडऩे का निर्देश दिया है।

एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के अनुरोध पर कोर्ट अब इस पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा। यहां पर बता दें कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रिकोणीय बिंदु के पास चंबल नदी पर स्थित एवं 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य को सर्वप्रथम 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित यह अभयारण्य घडियाल और गंगा डाल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षण प्रदान कर रहा है। लेकिन यहां पर माफिया का आतंक लगातार बढ़ रहा है।

सन 1975 से 1977 के मध्य हुए विश्व व्यापी सर्वे में 196 घडिय़ाल पाये गए थे जिनमें से भारत में 96 और चंबल में 46 थे। इसके बाद 1980 में चंबल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र को राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल अभ्यारण घोषित किया गया था।

पिछले 45 सालों में एक सैकड़ा से अधिक बार हो चुका है पुलिस और वन कर्मियों पर प्राण घातक हमला

घडिय़ाल का जीवन रेत से आरंभ होने के कारण हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी चंबल नदी के मध्य से एक-एक किलोमीटर दोनों किनारों तक किसी भी तरह का खनन, परिवहन पूर्णत प्रतिबंधित किया गया था। इसके बावजूद भी 45 वर्षों के दौरान एक सैकड़ा से अधिक बार प्रशासन, पुलिस वन ,राजस्व विभाग के अधिकारियों पर प्राण घातक हमले माफिया की ओर से किए जा चुके हैं।

वर्ष 2012 में खनन माफिया ने ट्रैक्टर से आईपीएस नरेंद्र सिंह जाट को कुचल दिया था। वहीं वर्ष 2014 अप्रैल में नूरादाबाद थाने के प्रधान आरक्षक श्री चौहान को रेत के डंपर से कुचल कर मौत के घाट उतार दिया था। वर्ष 2016 में वन आरक्षक को आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुचल दिया गया था अभी हाल ही में रेत के ट्रैक्टर ट्राली द्वारा हरकेश गुर्जर को कुचल दिए जाने के मामले को उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञान में लिया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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