टीईटी के विरोध में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी, अंबेडकर पार्क में किया उपवास

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टीईटी के विरोध में शिक्षक दिवस पर शिक्षकों ने बांधी काली पट्टी, अंबेडकर पार्क में किया उपवास


दतिया, 5 सितंबर (हि.स.)। एक तरफ जहां शनिवार को पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा था तो वहीं दतिया जिले के शासकीय शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जताई और सिविल लाइन स्थित अंबेडकर पार्क में उपवास पर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

शिक्षकों ने कहा कि विद्यालय में बच्चों को बेहतर शिक्षा देना उनका प्रमुख दायित्व है, लेकिन अपने अधिकारों, नौकरी की सुरक्षा और परिवार के हितों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना भी आवश्यक है। इसी क्रम में जिले के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शिक्षक दिवस पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। इसके लिए उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की मांग की है, ताकि लोकसभा और राज्यसभा में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 में आवश्यक संशोधन कराया जा सके।

शासकीय शिक्षकों ने सुबह 11 बजे अंबेडकर पार्क में प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद काली पट्टी बांधकर टीईटी के विरोध में नारेबाजी की और उपवास पर बैठ गए। शिक्षकों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की।

आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के दतिया जिलाध्यक्ष साबर सिंह दांगी ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के संबंध में न कोई आदेश जारी किया गया है और न ही कोई स्पष्ट निर्देश अथवा शिक्षकों की सूची जारी की गई है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों के बीच टीईटी परीक्षा का आवेदन भरने को लेकर असमंजस है। इसी के विरोध में शिक्षक काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

शिक्षकों ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी तरह मुक्त करने की मांग की है। इसके अलावा अध्यापक संवर्ग को नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता का लाभ देने, शिक्षकों के पक्ष में न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों के लिए अपमानजनक बताई जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था को बंद करने की मांग भी उठाई गई।

हिन्दुस्थान समाचार/संतोष

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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

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