छात्रसंघ चुनाव के लिए कांग्रेस ने 13 क्षेत्र प्रभारी बनाए, भोपाल में प्रकाश चौकसे, इंदौर में अमन बजाज संभालेंगे कमान
भोपाल, 21 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही कांग्रेस ने भी कैंपस की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां शुरू करते हुए प्रदेश के जिलों और संभागों को 13 क्षेत्रों में बांटकर चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कामले ने शुक्रवार को प्रभारियों की सूची जारी की। सभी प्रभारियों को एनएसयूआई समर्थित प्रत्याशियों को चुनाव में संगठनात्मक सहयोग देने, छात्र संगठनों से समन्वय करने और उन्हें जीत दिलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं। नियुक्ति पत्र की प्रतिलिपि एआईसीसी प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश सह-प्रभारियों, उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे, एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे सहित संबंधित जिला प्रभारियों को भेजी गई है। पार्टी ने सभी नेताओं से छात्रसंघ चुनाव में प्रभारियों को पूरा सहयोग देने को कहा है।
भोपाल-इंदौर समेत 13 क्षेत्रों में जिम्मेदारी
कांग्रेस ने अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की जिम्मेदारी बांटी है। भोपाल में प्रकाश चौकसे, इंदौर में अमन बजाज और ग्वालियर में हेवरन कसाना को प्रभारी बनाया गया है।
रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर की जिम्मेदारी मंजुल त्रिपाठी को दी गई है। सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ में अक्षय दुबे प्रभारी होंगे। शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में अजय यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी में विजय रजक संगठन की चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे। नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में मयूर जायसवाल, जबकि भिंड, मुरैना और श्योपुर में सचिन द्विवेदी प्रभारी होंगे। रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा का प्रभार अर्पित उपाध्याय को दिया गया है। शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और दतिया की जिम्मेदारी सौरभ यादव संभालेंगे। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर में दीपक डुंडीर तथा उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर, रतलाम, मंदसौर और नीमच में डॉ. विजय बोडाना को प्रभारी बनाया गया है।
प्रत्याशियों की तलाश से लेकर चुनावी रणनीति तक जिम्मेदारी
प्रभारियों का काम केवल चुनाव के दौरान संगठन को संभालना नहीं होगा, बल्कि वे स्थानीय स्तर पर छात्र नेताओं और छात्र संगठनों के साथ समन्वय करेंगे। एनएसयूआई समर्थित संभावित प्रत्याशियों को चुनाव के लिए तैयार करने और संगठन की गतिविधियां बढ़ाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं नेताओं पर रहेगी। कांग्रेस लंबे अंतराल के बाद होने वाले छात्रसंघ चुनाव को कैंपस में संगठन को दोबारा मजबूत करने के बड़े अवसर के रूप में देख रही है। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम और प्रक्रिया स्पष्ट होने से पहले ही संगठन ने मैदानी तैयारी शुरू कर दी है।
सितंबर में चुनाव का प्रावधान, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पर असमंजस
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में सितंबर 2026 में प्रदेश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान किया है। हालांकि, चुनाव किस पद्धति से होंगे, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। कांग्रेस और एनएसयूआई प्रत्यक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं। एनएसयूआई का कहना है कि प्रत्येक विद्यार्थी को सीधे अपने छात्रसंघ पदाधिकारियों को चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। संगठन ने प्रत्यक्ष चुनाव नहीं होने की स्थिति में प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद फिर खुला चुनाव का रास्ता
छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की कानूनी प्रक्रिया जबलपुर निवासी छात्र नेता अदनान अंसारी की जनहित याचिका के बाद आगे बढ़ी। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश के शासकीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2017 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए, जबकि छात्रों से छात्रसंघ चुनाव के नाम पर शुल्क लिया जाता रहा। याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने की मांग भी की गई थी। 15 जुलाई 2026 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर पेश करने और उसमें छात्रसंघ चुनाव व छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद 3 अगस्त को सरकार ने कैलेंडर पेश किया, जिसमें सितंबर में चुनाव कराने का प्रावधान किया गया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कैलेंडर को रिकॉर्ड पर लेते हुए प्रदेश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने के निर्देश के साथ याचिका का निराकरण किया। चुनाव के दौरान जरूरत पड़ने पर कॉलेज प्राचार्य या विश्वविद्यालय कुलपति स्थानीय प्रशासन और पुलिस से सुरक्षा मांग सकेंगे।
लिंगदोह समिति के मानकों के तहत चुनाव
छात्रसंघ चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप, हिंसा और धनबल की शिकायतों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2005 को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। 22 सितंबर 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए देशभर में छात्रसंघ चुनाव इन्हीं मानकों के अनुसार कराने के निर्देश दिए थे।
इन सिफारिशों में उम्मीदवारों की उम्र, शैक्षणिक उपस्थिति, चुनाव खर्च, आपराधिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक हस्तक्षेप सहित कई पहलुओं के लिए नियम तय किए गए हैं। समिति ने प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और मिश्रित चुनाव प्रणाली का विकल्प भी रखा था।
2003 में बंद हुए थे प्रत्यक्ष चुनाव
मध्य प्रदेश में 2003 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनाव बंद कर दिए थे। इसके बाद कुछ समय तक कक्षा प्रतिनिधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष चुनाव कराए गए। वर्ष 2006 में उज्जैन के माधव कॉलेज में प्रोफेसर एचएस सभरवाल की हत्या के बाद छात्रसंघ चुनाव पूरी तरह रोक दिए गए।
इसके बाद 2017 में सरकार ने करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू किए। उस समय कक्षा प्रतिनिधियों के चुनाव के साथ कॉलेज स्तर पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए प्रक्रिया अपनाई गई थी। विश्वविद्यालय स्तर पर निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों के माध्यम से परिषद का गठन किया गया था। यह व्यवस्था पूरी तरह प्रत्यक्ष चुनाव की नहीं थी।
2017 के बाद कोरोना महामारी समेत विभिन्न कारणों से चुनाव नहीं हो सके। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सितंबर 2026 में चुनाव कराने का रास्ता खुला है। कांग्रेस ने 13 क्षेत्र प्रभारियों की नियुक्ति के साथ अपनी तैयारी तेज कर दी है। ऐसे में चुनाव प्रणाली को लेकर प्रत्यक्ष बनाम अप्रत्यक्ष का मुद्दा आने वाले दिनों में कैंपस राजनीति का सबसे अहम मुद्दा बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

