पीडीएस महिला विक्रेताओं की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, 120 दुकानों पर पीओएस मशीनें बंद
नीमच, 3 अक्टूबर (हि.स.)। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर मध्य प्रदेश में राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े संगठनों का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी है। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में आंदोलन के तीसरे दिन करीब 120 महिला पीडीएस विक्रेताओं ने अपनी पीओएस मशीनें बंद रखीं। जिले की कुल 324 राशन दुकानों पर राशन वितरण प्रभावित होने की बात सामने आई है।
सेवा सहकारी सोसाइटी, महिला स्वयं सहायता समूह पीडीएस विक्रेता और भंडारण से संबंधित राशन दुकानों के संयुक्त संगठन के बैनर तले यह आंदोलन किया जा रहा है। आंदोलनकारी महिला विक्रेताओं का कहना है कि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला कमीशन दुकान संचालन और अन्य खर्चों की तुलना में पर्याप्त नहीं है।
संयुक्त संगठन की प्रमुख मांग है कि मध्य प्रदेश में भी अन्य राज्यों की व्यवस्था के अनुरूप राशन वितरण पर 200 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन निर्धारित किया जाए। महिला पीडीएस विक्रेताओं का कहना है कि उचित कमीशन मिलने से ही वे राशन दुकानों के संचालन से जुड़े खर्चों को पूरा कर सकेंगी और अपने परिवार का भरण-पोषण भी कर सकेंगी।
महिला स्वयं सहायता समूह पीडीएस विक्रेताओं के अनुसार पूर्व में उन्हें करीब 10,500 रुपये मासिक कमीशन के आधार पर राशन दुकानें संचालित करने की व्यवस्था मिली थी। बाद में कमीशन में कमी की गई। उस समय इसे टीडीएस कटौती आदि से जोड़कर बताया गया था और भविष्य में राशि मिलने की बात कही गई थी।
महिला विक्रेताओं के मुताबिक वर्तमान व्यवस्था में 200 से अधिक राशन कार्ड वाली दुकानों के लिए करीब 8,300 रुपये और 200 से कम राशन कार्ड वाली दुकानों के लिए 5,500 रुपये की राशि निर्धारित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं वर्ष 2022 के बाद महिला स्वयं सहायता समूहों को संचालन के लिए मिली दुकानों के लिए भी 5,500 रुपये की राशि निर्धारित किए जाने से विक्रेताओं के सामने आर्थिक कठिनाइयां बढ़ी हैं।
महिला पीडीएस विक्रेताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की कई राशन दुकानों पर 400, 500 और 700 से अधिक राशन कार्ड हैं। कुछ दुकानों पर कार्डों की संख्या 1000 तक पहुंच गई है। इसके बावजूद दुकान संचालन के लिए मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि दुकान से जुड़े खर्चों के साथ परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी है, ऐसे में मौजूदा कमीशन में काम करना मुश्किल हो रहा है।
महिला स्वयं सहायता समूह संगठन मध्य प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती माया मनोहर बैरागी ने कहा कि महिला पीडीएस विक्रेता सरकार के विरोध में नहीं हैं। वे शासन की महत्वपूर्ण सार्वजनिक वितरण प्रणाली को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की नीति तभी अधिक प्रभावी होगी, जब सरकार के लिए महत्वपूर्ण कार्य करने वाली इन कामकाजी गरीब महिलाओं को भी उनके श्रम के अनुरूप उचित आर्थिक सहयोग और सम्मान मिले। महिला विक्रेताओं ने अपनी मांगों पर शासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा जताई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

