अनूपपुर: इंगांराजविवि में 'तसर रेशम उत्पादन और जनजातीय सशक्तिकरण' पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

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अनूपपुर: इंगांराजविवि में 'तसर रेशम उत्पादन और जनजातीय सशक्तिकरण' पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न


अनूपपुर, 21 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में शनिवार को 'तसर बीज उत्पादन में नवीन प्रगति एवं भावी रणनीतियाँ, जनजातीय सशक्तिकरण एवं युवा सहभागिता' विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।

केंद्रीय रेशम बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) के बुनियादी बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण केंद्र, बालाघाट तथा विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने रेशम कीट पालन की आधुनिक तकनीकों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्य अतिथि और प्रभारी कुलपति प्रो. ब्योमकेश त्रिपाठी ने कहा कि तकनीक का सही उपयोग ही जनजातीय सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा इस क्षेत्र में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

विषय विशेषज्ञों ने रखी बात

कार्यशाला में डॉ. देश दीपक चौधरी, सहायक प्राध्यापक, प्राणीशास्त्र विभाग, ने तसर रेशम के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं और शोध कार्यों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. बावस्कर दत्ता मदन (वैज्ञानिक-सी , बालाघाट) ने तसर बीज उत्पादन के वर्तमान परिदृश्य और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। जिसमें अमरकंटक और अनूपपुर क्षेत्र में तसर बीज उत्पादन की वर्तमान स्थिति और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। संतकुमार वरकड़े, सहायक संचालक रेशम, ने मध्य प्रदेश मे तसर रेशम कीट पर जानकारी दी। डॉ. संदीप कौशिक, सहायक प्राध्यापक, पर्यावरण विज्ञान, ने रेशम कीट पालन पर पर्यावरण के प्रभाव को समझाया, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सचिंद्र कुमार पाण्डेय ने कृषि और रेशम पालन के समन्वय पर अपने विचार रखे।

विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. भूमि नाथ त्रिपाठी (डीन अकादमिक) और डॉ विजय परमानिक, विभागद्यक्ष, प्राणीशास्त्र विभाग, विज्ञान संकाय, प्रोफेसर तरुण ठाकुर, डी एस डब्ल्यू, ने भी संबोधित किया।

तकनीकी सत्र में वैज्ञानिक नवीनचंद्र रेड्डी ने एक 'सफल बीजागर' स्थापित करने के प्रमुख कारकों को विस्तार से समझाया। साथ ही प्रक्षेत्र सहायक उदय पोहकर ने सफल कृषकों के अनुभवों को साझा करते हुए कीट पालन में बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा की। अंत में सभी को विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। मंच संचालन रुचिता एस. तिवारी द्वारा किया गया।

नवीनचंद्र रेड्डी और डॉ पल्लवी शुक्ला, प्राणीशास्त्र विभाग, द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में राज्य रेशम विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, छात्र, शोधार्थी और स्थानीय रेशम पालक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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