जहरीली शराब मामले में उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- अवैध नेटवर्क की हो उच्चस्तरीय जांच

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जहरीली शराब मामले में उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, बोले- अवैध नेटवर्क की हो उच्चस्तरीय जांच


भोपाल, 07 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार और आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सागर के प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद साेमवार काे राजधानी भोपाल में अपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मामले की जांच को केवल शराब बेचने वालों तक सीमित रखने के बजाय शराब के निर्माण, बॉटलिंग, लेबलिंग, परिवहन और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि सागर में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में उपचाररत हैं। उन्होंने कहा कि मृतकों में कई परिवारों ने अपने युवा सदस्यों और परिवार के कमाने वाले लोगों को खोया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन मौतों की जिम्मेदारी तय करने के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कब होगी।

यूपी कनेक्शन के दावे पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने शराब के उत्तर प्रदेश कनेक्शन को लेकर सामने आ रहे दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार और आबकारी विभाग उत्तर प्रदेश से शराब आने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उन्होंने दावा किया कि अवैध शराब के नेटवर्क के तार मध्यप्रदेश के उज्जैन सहित अन्य स्थानों से जुड़े होने की आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

सिंघार ने गुजरात के भावनगर में हुई जहरीली शराब की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की जांच में उज्जैन से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मध्यप्रदेश में सक्रिय अवैध शराब नेटवर्क और उसकी सप्लाई चेन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

आबकारी विभाग की भूमिका पर उठाए सवाल

उमंग सिंघार ने आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के सागर पहुंचने और विभागीय कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक जिला आबकारी अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने डिस्टलरी संचालकों की भूमिका की भी जांच की मांग की।

उन्होंने ‘सागर गाेल्ड’ को लेकर आबकारी विभाग के आदेश में बदलाव पर भी सवाल उठाया। सिंघार के अनुसार, पहले शराब की बिक्री पर रोक लगाने, उपलब्ध स्टॉक सील-जप्त करने और एफएसएल जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन बाद में संशोधित आदेश में कार्रवाई को सीमित कर दिया गया। उन्होंने पूछा कि एक ही दिन में आदेश में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या कारण थे।

डिस्टलरी और री-पैकेजिंग नेटवर्क की जांच की मांग

सिंघार ने आरोप लगाया कि नकली शराब को ब्रांडेड बोतलों में भरकर बाजार में खपाने का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। उन्होंने कहा कि आबकारी ठेकेदारों की ओर से अवैध शराब के कारोबार को लेकर पहले शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि शिकायतों पर समय रहते क्या कार्रवाई हुई।

उन्होंने मांग की कि जांच में केवल एक ब्रांड या एक आरोपी तक सीमित न रहकर शराब की सप्लाई चेन और उससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका सामने लाई जाए।

25 लाख रुपये मुआवजे की मांग

सरकार की ओर से घोषित चार लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुआवजा किसी की जान वापस नहीं ला सकता, लेकिन प्रभावित परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।

निवेश को लेकर भी सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रस्तावित दुबई दौरे का जिक्र करते हुए सिंघार ने कहा कि एक ओर सरकार मध्यप्रदेश में निवेश लाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जहरीली शराब, दूषित पानी और अन्य घटनाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। सिंघार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों, शराब कारोबारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका तय करने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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