अनूपपुर: मानव और वन्यजीवों के सुरक्षित सह-अस्तित्व के लिए समन्वित प्रयास जरूरी - कलेक्टर

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अनूपपुर: मानव और वन्यजीवों के सुरक्षित सह-अस्तित्व के लिए समन्वित प्रयास जरूरी - कलेक्टर




जिले के सक्रिय स्नेक कैचर्स के लिए विशेष सम्मान एवं 'स्नेक किट' का वितरण

अनूपपुर, 24 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में सर्पदंश की घटनाओं को न्यूनतम करने, अंधविश्वास को मिटाने और मानव-वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल करते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बुधवार को जिलेभर से आए सक्रिय स्नेक कैचर्स के लिए विशेष सम्मान एवं 'स्नेक किट' वितरण किया। इस दौरान सर्प मित्रों को आधुनिक और सुरक्षित रेस्क्यू उपकरणों से लैस किट प्रदान की गई, जिससे वे संकट के समय अपनी और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

इस दौरान कलेक्टर ने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए सांप पारिस्थितिकी तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आमतौर पर लोग भय और जागरूकता की कमी के कारण सांपों को देखते ही मार देते हैं। इस मानसिकता में बदलाव लाना बेहद जरूरी है और इस कार्य में सर्प मित्रों की भूमिका मार्गदर्शक जैसी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने और त्वरित सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से आने वाले समय में प्रत्येक गांव में एक ‘सर्प प्रहरी’ तैयार करने की योजना पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

कलेक्टर ने अमरकंटक क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि जिले के वनों में विषैली और दुर्लभ सर्प प्रजातियां पाई जाती हैं। वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए वन विभाग और सर्प मित्रों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उन्होंने जिले के नागरिकों को आश्वस्त किया कि आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित शासकीय चिकित्सालयों में सर्पदंश उपचार हेतु पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता करा दी गई है।

वनमंडलाधिकारी डेविड वेंकटेश चनाब ने सर्प मित्रों को रेस्क्यू कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की समझाइश दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्प रेस्क्यू का उद्देश्य किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि मानव और सर्प दोनों के अनमोल जीवन की रक्षा करना है। डीएफओ ने सर्पदंश के मामलों में पहले एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास के जाल में न फंसें और पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर जाएं।

वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल ने विभिन्न प्रजातियों के सांपों की पहचान, उनके व्यवहार तथा सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से सर्प रेस्क्यू करने की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी और सर्प मित्रों को रेस्क्यू के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी से सांपों के प्रति अनावश्यक भय को दूर किया जा सकता है तथा मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा की जा सकती है।

अंत में कलेक्टर हर्षल पंचोली द्वारा क्षेत्र के सक्रिय सर्प मित्रों को शासकीय स्नेक किट प्रदान की गई। किट प्राप्त करने वालों में शशिधर अग्रवाल, छोटेलाल यादव, मनोज यादव, धर्मेंद्र यादव, नवीन, महादेव, लाल दास, राम सिंह, दुर्गेश, आकाश यादव, भोला, द्वारिका, ऋषि राज, हरिवंश, भास्कर, वरुण, माखन, बाबूलाल एवं बृजेश पनिका शामिल रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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