“राम जनमु जग मंगल हेतु” स्वामी रामभद्राचार्य की 9 दिवसीय श्रीराम कथा प्रारम्भ
जबलपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गौरीघाट स्थित आयुर्वेद कॉलेज मैदान (अवधपुरी) में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का रविवार को शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने मंगलाचरण के दौरान भगवान श्रीराम के अवतार के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म केवल विप्र, धेनु, देव और संतों के हित के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण के लिए हुआ है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस की चौपाई “राम जनमु जग मंगल हेतु” का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान का अवतार संपूर्ण जगत के मंगल के लिए होता है। अनेक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जब संसार में अमंगल बढ़ता है, तब भगवान स्वयं प्रकट होकर संतुलन स्थापित करते हैं।
महाराजश्री ने “चिदानंद मय देह तुम्हारी” चौपाई के माध्यम से भगवान के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान विकार रहित हैं और भक्तों की इच्छा से ही प्रकट होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान श्रीराम माया, तीनों गुणों और इंद्रियों से परे हैं। जब रावण के अत्याचारों से जगत में अमंगल बढ़ गया, तब श्रीराम का अवतार हुआ।
मां नर्मदा की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि नर्मदा की निर्मलता अद्वितीय है। “नर्मदा” का अर्थ ही है वासनाओं का क्षय करना, अर्थात जो मन को पवित्र करे वही नर्मदा है। महाराजश्री ने भगवान को समझने के लिए आठ सिद्धांतों—व्याकरण, उपमान, कोष, आप्तवाक्य, व्यवहार, वाक्य शेष, विवृत्ति और सानिध्य—का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके आधार पर ही शास्त्रीय अर्थों की सही व्याख्या संभव है।
कथा का आयोजन सामाजिक समरसता के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसका सजीव उदाहरण मंच पर देखने को मिला। विभिन्न वर्गों और समाज के प्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक सुशील तिवारी ‘इंदु’, अभिलाष पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आयोजक समरसता सेवा संगठन के पदाधिकारियों द्वारा विधिवत पादुका पूजन किया गया। कथा से पूर्व निकाली गई नर्मदा कलश यात्रा ने भी भव्यता और दिव्यता का नया इतिहास रचा। महाराजश्री ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि समरसता के इस पावन प्रयास से समाज में सकारात्मक संदेश जा रहा है। उन्होंने आयोजन समिति और अध्यक्ष संदीप जैन की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज को प्रकाशित करने वाला दीपक बताया। इस अवसर पर अभिजात कृष्ण त्रिपाठी, आलोक पाठक, श्रीकांत साहू, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और अंत में सभी भक्तों को प्रसादी का वितरण किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

