राजगढ़ः गजेंद्र मोक्ष से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तक की कथाओं ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

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राजगढ़ः गजेंद्र मोक्ष से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव तक की कथाओं ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर


राजगढ़, 02 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सुठालिया समीपस्थ ग्राम बाल्यपुरा में 30 मई से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस मंगलवार को कथावाचक धर्माचार्य पंडित द्वारका जी महाराज ने भगवान की विभिन्न लीलाओं और अवतारों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने भक्ति रस में डूबकर भगवान के चरित्रों का श्रवण किया।

कथावाचक ने गजेंद्र मोक्ष प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ग्राह (मगरमच्छ) ने गजेंद्र हाथी को पकड़ लिया और सभी प्रयास विफल हो गए, तब उसने भगवान विष्णु का स्मरण किया। भक्त की पुकार सुनकर भगवान स्वयं प्रकट हुए और गजेंद्र को संकट से मुक्त कराया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। इसके बाद समुद्र मंथन की कथा का वर्णन किया गया।

देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों और अमृत प्राप्ति की कथा सुनाकर धर्माचार्य ने बताया कि परिश्रम और धैर्य से ही जीवन में अमृत समान सफलता प्राप्त होती है। भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथा में वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए राजा बलि की दानशीलता और भगवान के विराट स्वरूप की महिमा का वर्णन किया गया। वहीं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग के दौरान कथा पंडाल कृष्णमय हो उठा। कंस के कारागार में भगवान कृष्ण के जन्म, वासुदेव द्वारा यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने तथा नंद-यशोदा के घर हुए आनंदोत्सव का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथा के दौरान जयकारों और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

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