शिवपुरीः आवारा कुत्ते का आतंक, 60 से अधिक लोग घायल, मासूम का चेहरा नोचा

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शिवपुरीः आवारा कुत्ते का आतंक, 60 से अधिक लोग घायल, मासूम का चेहरा नोचा


शिवपुरी, 30 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में शनिवार का दिन कई परिवारों के लिए भय और दर्द की कहानी बन गया। एक आवारा कुत्ते ने सुबह से लेकर शाम तक शहर की सड़कों पर ऐसा आतंक मचाया कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तक उसके हमले का शिकार हो गए। जिला अस्पताल में शाम तक 60 से अधिक लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे, जबकि कई घायलों का उपचार निजी अस्पतालों में भी कराया गया।

सबसे मार्मिक घटना महल के पीछे स्थित लक्ष्मीबाई कॉलोनी रोड पर हुई, जहां घर के बाहर खेल रही महज ढाई साल की एक मासूम बच्ची पर कुत्ते ने अचानक हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ते ने बच्ची के चेहरे को अपने जबड़ों में जकड़ लिया। मासूम की चीखें सुनकर परिजन और आसपास के लोग दौड़े। काफी मशक्कत के बाद बच्ची को बचाया जा सका, लेकिन तब तक उसका चेहरा गंभीर रूप से घायल हो चुका था। यह दृश्य देखकर मौजूद लोगों की रूह कांप उठी। बच्ची को बचाने पहुंचे एक व्यक्ति को भी कुत्ते ने अपना शिकार बना लिया।

इसके बाद भी कुत्ते का हमला नहीं रुका। विजयपुरम निवासी बलराम सिंह रावत सहित कई अन्य नागरिक उसके हमले का शिकार बने। एक आठ वर्षीय बच्ची समेत दर्जनों लोग घायल हुए। शहर के अलग-अलग इलाकों में लोग डर के साये में रहे और बच्चों को घरों से बाहर निकालने में भी घबराने लगे।

सवालों के घेरे में नगर पालिका

इस घटना ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या कोई नई समस्या नहीं है। नागरिक वर्षों से शिकायतें करते आ रहे हैं कि सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में झुंड के रूप में घूम रहे आवारा कुत्ते लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा न तो प्रभावी पकड़-धकड़ अभियान चलाया गया और न ही समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई दी।

यदि एक ही दिन में 60 से अधिक लोग कुत्ते के हमले का शिकार हो जाते हैं, तो यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं बल्कि नगर पालिका की लापरवाही और विफल व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सवाल यह भी है कि जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं, तब जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय आखिर किस बात का इंतजार कर रहे थे?

क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार?

शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी अभियान चलाया गया होता तो आज मासूम बच्चों और आम नागरिकों को इस दर्द से नहीं गुजरना पड़ता। लोगों में आक्रोश है कि प्रशासन और नगर पालिका अक्सर घटनाओं के बाद सक्रिय दिखाई देते हैं, जबकि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से तैयारी और निगरानी आवश्यक है।

आज एक ढाई साल की मासूम का चेहरा जख्मी हुआ है, कल किसी की जान भी जा सकती है। ऐसे में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों को जवाब देना होगा कि आखिर शहर की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए अब तक क्या किया गया और आगे क्या किया जाएगा?

शिवपुरी की जनता अब आश्वासनों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहती है। क्योंकि सवाल केवल आवारा कुत्तों का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का है।

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हिन्दुस्थान समाचार / युगल किशोर शर्मा

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