राष्ट्र की अवधारणा क्या है, इसके सिद्धांत क्या हैं, इन्हें समझने की आवश्यकता- योगेश भारद्वाज
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शिवपुरी नगर में विभिन्न स्थानों पर हुए विराट हिंदू सम्मेलन
सामाजिक एकजुटता, राष्ट्रहित और सांस्कृतिक संरक्षण पर दिया गया जोर
शिवपुरी, 11 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शिवपुरी जिले में विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में जिले भर में विराट हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को शिवपुरी नगर सहित जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न हुए, जिनमें बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने सहभागिता कर सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया।
रविवार को शिवपुरी नगर की आर्य समाज बस्ती, जल मंदिर बस्ती और मनियर बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इन सम्मेलनों में बड़ी संख्या में हिंदू भाई-बहन उपस्थित रहे। आर्य समाज बस्ती में आयोजित सम्मेलन को वैदिक संस्थान के योगेश भारद्वाज ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्र की अवधारणा और उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें यह समझना आवश्यक है कि राष्ट्र क्या होता है और उसका वास्तविक स्वरूप क्या है।
योगेश भारद्वाज ने भारतीय संस्कृति में वेदों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि राष्ट्र चार प्रमुख घटकों भूमि, जन, संस्कृति और व्यवस्था से मिलकर बनता है। उन्होंने राष्ट्र की अवधारणा, उसके सिद्धांत और भारतीय संस्कृति को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज एक राष्ट्र के रूप में अपनी संस्कृति को नहीं समझेगा, तब तक उसका समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि हिंदू समाज की एकता ही राष्ट्र को सशक्त बना सकती है। सम्मेलन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया गया।
इसी क्रम में शिवपुरी नगर की जल मंदिर बस्ती में भी भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ किया गया। इस सम्मेलन में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से सकल हिंदू समाज के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जिला प्रचारक जितेंद्र गोस्वामी ने कहा कि भारत भूमि और सनातन हिंदू धर्म में जन्म लेना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि पराधीनता के काल में हिंदू समाज में हीन भावना उत्पन्न हो गई थी, जिससे हिंदू पहचान को लेकर संकोच की स्थिति बन गई थी।
जितेंद्र गोस्वामी ने बताया कि हिंदुत्व के गौरव को पुनः स्थापित करने और समाज को संगठित करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि आज भी समाज को पूर्ण रूप से जागृत करने की आवश्यकता है और इसी चेतना को जागृत करने के लिए देशभर में हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
शिवपुरी नगर के साथ-साथ जिले के ग्रामीण अंचलों सुरवाया, पोहरी और बैराड़ में भी रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। इन सम्मेलनों में वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकता, सामूहिक शक्ति के प्रकटीकरण, राष्ट्रहित और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन स्थलों को भगवा ध्वजों और बैनरों से सजाया गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव और उल्लास का वातावरण बना रहा। इन आयोजनों के माध्यम से समाज में एकता, जागरूकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / रंजीत गुप्ता

