झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम

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झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम


झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम


झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम


झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम


झाबुआ: अंतिम श्रावण सोमवार पर सब तरफ उद्घौषित हुआ हर हर महादेव; शिवमय हुए नगर ग्राम


झाबुआ, 24 अगस्त (हि.स.)। अंतिम श्रावण सोमवार पर मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिला मुख्यालय सहित नगरीय इलाकों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिव आराधना अपने शीर्ष सौपान पर पहुंच गई। विभिन्न स्थानों पर आज हर हर महादेव के दिव्यतम उद्घौष और शिव महिमा का गान करते संगीतमय भजनों के साथ बड़े ही धूमधाम के साथ भगवान् शिव की सवारी निकाली गई। इस शानदार अवसर पर स्थानीय निवासियों सहित दूरदराज क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। भगवान् शिव की सवारी की जगह-जगह पूजा की गई, एवं रास्तेभर फूल बरसाते हुए अभिनंदन किया गया।

श्रावण मास के आखिरी सोमवार पर जिले में शिव आराधना अपने उच्च तम शिखर पर पहुंच गई।

जिला मुख्यालय के तालाब किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर, पेटलावद नगर एवं इसी जनपद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अति प्राचीन श्री श्रृंगेश्वर धाम स्थित शिव मंदिर, मेघनगर स्थित शंकर मंदिर, एवं थांदला नगर के पद्मावती नदी किनारे स्थित अहिल्याबाई होलकर द्वारा स्थापित काशी विश्वनाथ मंदिर, एवं थांदला नगर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित कल्लेश्वर महादेव मंदिर में प्रातः कालीन वेला में भगवान् शिव की पूजन अर्चन एवं स्तवन के साथ आरंभ हुआ शिव आराधना का सिलसिला देर शाम तक जारी है। अंतिम श्रावण सोमवार के अवसर पर आज विभिन्न स्थानों पर धूमधाम से भगवान् शिव की शाही सवारी निकाली गई। इस मौके पर थांदला में एक तरफ जहां श्री कल्लेश्वर महादेव मंदिर से आकर्षक पालकी में शाही सवारी निकाली गई, वहीं अहिल्याबाई होलकर द्वारा स्थापित काशी विश्वनाथ मंदिर से बैलगाड़ी में भगवान् शिव प्रतिमा विराजमान कर शाही सवारी निकाली गई, सवारी के पीछे विशाल नंदी प्रतिमा भी शोभायमान रही। कल्लैश्वर महादेव मंदिर से निकली शाही सवारी पहले प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर पहुंची, जहां शिव पूजन अर्चन के साथ हरिहर मिलन हुआ, तत्पश्चात शाही सवारी काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची, जहां से नगर भ्रमण करते हुए अपने मूल स्थानों पर पहुंची। शिव आराधना की इस श्रृंखला में जिले के राणापुर से पैदल यात्रा करत हुए बड़ी संख्या श्रद्धालुओं का एक जत्था प्राचीन देवझिरी शिव मंदिर पहुंचा था, जहां गोमुख से नि:सृत नर्मदा जल से भगवान् शिव का अभिषेक किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

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