शनिदेव जन्मोत्सव पर दुर्लभ संयोग, शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री व्रत एक साथ
सीहोर, 15 मई (हि.स.)। शनिवार 16 मई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला माना जा रहा है। इस दिन शनि जयंती, शनिश्चरी अमावस्या, वट सावित्री व्रत और शनिवार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह दिन शनि उपासना, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि भगवान शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या को हुआ था। इस बार अमावस्या शनिवार को भरणी नक्षत्र में पड़ रही है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव भगवान शिव के आशीर्वाद से तीनों लोकों के प्राणियों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
ज्योतिषाचार्य सुनील शर्मा के अनुसार वर्तमान में कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। इनमें मेष राशि पर प्रथम चरण, मीन राशि पर द्वितीय चरण और कुंभ राशि पर अंतिम चरण प्रभावी है। वहीं सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या का प्रभाव बताया गया है।
उन्होंने बताया कि शनिदेव के जन्मोत्सव पर भगवान शिव, हनुमानजी और शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना लाभकारी मानी जाती है। श्रद्धालुओं को शनि मंत्र जाप, हवन-पूजन, छायादान तथा सरसों और तिल के तेल से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही काली उड़द, काले तिल, काला वस्त्र, इमरती और नीले फूल अर्पित करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और छाता दान करने तथा पीपल और शमी वृक्ष के पास दीपक जलाने की भी सलाह दी गई है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस अवसर पर रुद्राभिषेक, हनुमान चालीसा, शनि चालीसा और दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी रहेगा। वहीं शनिश्चरी अमावस्या और वट सावित्री व्रत के संयोग के चलते महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट वृक्ष की पूजा करेंगी।
जिले के विभिन्न शनि मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्कशॉप रोड जनता कॉलोनी गल्ला मंडी स्थित शनि मंदिर, शेरपुर स्थित मंदिर, ढेकिया पहाड़ी तथा सीवन नदी महिला घाट स्थित शनिदेव मंदिरों में हवन, पूजन और तेल अभिषेक के कार्यक्रम होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

