सिवनीः जिला चिकित्सालय में शिशु मृत्यु के बढ़ते मामलों पर विधायक दिनेश राय सख्त, औचक निरीक्षण में मिलीं अव्यवस्थाएं

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सिवनीः जिला चिकित्सालय में शिशु मृत्यु के बढ़ते मामलों पर विधायक दिनेश राय सख्त, औचक निरीक्षण में मिलीं अव्यवस्थाएं


चिकित्सकों की अनुपस्थिति और लापरवाही की जांच की मांग; विधायक ने मुख्यमंत्री, आयुक्त स्वास्थ्य सेवा और कलेक्टर को लिखा पत्र

सिवनी,10 अक्टूबर(हि.स.)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में शनिवार को क्षेत्र के विधायक दिनेश राय ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल के शिशु विभाग में शिशु मृत्यु के बढ़ते मामलों, चिकित्सकों की अनुपस्थिति और उपचार में कथित लापरवाही को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। विधायक ने इस पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

प्राप्त शिकायतों के आधार पर विधायक दिनेश राय जिला चिकित्सालय पहुंचे और शिशु विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शिकायतों में शिशु विभाग के चिकित्सकों के नियमित रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने, भर्ती शिशुओं की समुचित देखभाल नहीं किए जाने, चिकित्सकीय कार्यों में लापरवाही बरतने तथा शिशु मृत्यु के मामलों में वृद्धि होने की बात कही गई थी।

बढ़ी शिशु मृत्यु की संख्या, मामला गंभीर

निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से चर्चा में सामने आया कि बीते लगभग चार माह में शिशु मृत्यु के मामले बढ़े हैं, जो चिंता का विषय है। निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों की अनुपस्थिति भी सामने आई। वहीं, एक आवेदन में अवकाश की अवधि स्पष्ट रूप से अंकित नहीं पाई गई। इसके अतिरिक्त अस्पताल में अन्य अव्यवस्थाएं भी सामने आने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा पत्र

विधायक दिनेश राय ने इस मामले से मुख्यमंत्री, आयुक्त स्वास्थ्य सेवा एवं जिला कलेक्टर को अवगत कराया है। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि जिला चिकित्सालय आम नागरिकों के साथ-साथ नवजात शिशुओं और गंभीर अवस्था में भर्ती बच्चों के उपचार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में चिकित्सकों की अनियमित उपस्थिति, कर्तव्यों के निर्वहन में संभावित लापरवाही और शिशुओं की समुचित देखभाल में कमी गंभीर विषय हैं।

विधायक ने जिला चिकित्सालय के शिशु विभाग में बढ़ते शिशु मृत्यु के मामलों, चिकित्सकों की अनुपस्थिति और कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

सिविल सर्जन बोले 46 बच्चों की मौत के कारणों का परीक्षण जारी

इस संबंध में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. विनोद नावकर ने बताया कि अस्पताल में बरघाट, लखनादौन, घंसौर सहित विभिन्न क्षेत्रों से गंभीर अवस्था में बच्चे उपचार के लिए आते हैं। इनमें 900 ग्राम और 1500 ग्राम वजन वाले नवजात शिशुओं के साथ-साथ सात माह में जन्मे (सतमाहे) बच्चे भी शामिल होते हैं। ऐसे बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

डॉ. नावकर के अनुसार, बीते चार माह में जिला चिकित्सालय में 46 बच्चों की मृत्यु हुई है। इन मामलों के कारणों का परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शिशु मृत्यु के मामले में सिवनी जिला चिकित्सालय का स्तर मध्यप्रदेश के औसत स्तर से कम है।

फिलहाल, शिशु मृत्यु के कारणों और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर जांच की मांग के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की समीक्षा कर क्या कदम उठाते हैं। नवजात शिशुओं और गंभीर अवस्था में भर्ती बच्चों को समय पर बेहतर उपचार तथा समुचित देखभाल उपलब्ध कराना अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / रवि सनोदिया

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