स्कूलों में शिक्षक नहीं, भर्ती में पद नहीं! 26 दिन से सड़कों पर चयनित शिक्षक, बोले- पदवृद्धि के बिना नहीं लौटेंगे
भोपाल, 16 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के दावों के बीच राजधानी में चल रहा चयनित शिक्षकों का आंदोलन अब सरकार के सामने बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। एक तरफ प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों का आंकड़ा डेढ़ लाख तक बताया जा रहा है, दूसरी तरफ अगले दो वर्षों में करीब 18 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात सामने आ रही है।
दरअसल, इसी अंतर को लेकर शिक्षक भर्ती-2025 के चयनित अभ्यर्थी पिछले 26 दिन से राजधानी में आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को उन्होंने नीलम पार्क छोड़कर राज्य शिक्षा केंद्र (डीपीआई) के सामने डेरा डाल दिया। अभ्यर्थी रातभर वहीं बैठे रहे। उनका ऐलान है कि “जब तक पदवृद्धि नहीं होगी, आंदोलन खत्म नहीं होगा।”
रिक्तियां हजारों में, भर्ती के आंकड़े सीमित
प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी कोई नई चुनौती नहीं है। विभिन्न सरकारी और स्वतंत्र आंकड़ों में सरकारी स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों की संख्या करीब 1.5 लाख से 1.98 लाख तक बताई जाती रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार सिर्फ माध्यमिक विद्यालयों में ही 47,122 पद रिक्त हैं।
वहीं, इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की ओर से अगले दो वर्षों में करीब 18 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात कही गई है। इससे पहले करीब 10 हजार पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सामने आया था। अब आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि जब स्कूलों में शिक्षक कम हैं और योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं, तो भर्ती के पद बढ़ाने में अड़चन क्या है?
25 दिन नीलम पार्क में, अब डीपीआई पर डेरा
वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेश भर के अभ्यर्थियों ने 21 अगस्त को भोपाल में प्रदर्शन किया था। डीपीआई के सामने ज्ञापन और प्रदर्शन के बाद रैली निकालकर वे नीलम पार्क पहुंचे और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। करीब 25 दिन तक धरना देने के बाद मंगलवार को आंदोलनकारी डीपीआई पहुंच गए।
अब आंदोलन का केंद्र सीधे शिक्षा विभाग का कार्यालय बन गया है। अभ्यर्थियों ने रात भी वहीं गुजारी। उनका कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में आंदोलन और अपनी मांग सरकार के सामने रखने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब वे पीछे हटने के बजाय पदवृद्धि की घोषणा तक डटे रहने का निर्णय ले चुके हैं।
वर्ग-2 में हर विषय के 2 हजार, वर्ग-3 में 25 हजार पद मांग
आंदोलनरत अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 2,000 पद और वर्ग-3 में 25,000 पद बढ़ाए जाएं। उनका तर्क है कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और भर्ती प्रक्रिया में उपलब्ध योग्य अभ्यर्थियों को देखते हुए पदों में वृद्धि स्वाभाविक आवश्यकता है।
7,217 से अधिक स्कूलों में एक ही शिक्षक
शिक्षक संकट की जमीनी तस्वीर एकल-शिक्षक स्कूलों से भी सामने आती है। प्रदेश में 7,217 से अधिक स्कूलों के एकल-शिक्षक स्कूल होने की बात सामने आती रही है। इन स्कूलों में एक शिक्षक को कई कक्षाओं को संभालने के साथ शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्व भी निभाने पड़ते हैं।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में चुनौती और गंभीर है। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों में विषय विशेषज्ञों की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करती है। ऐसे में एक ओर आधुनिक सुविधाओं से लैस सीएम राइज स्कूलों की तस्वीर सामने रखी जा रही है, तो दूसरी ओर सामान्य सरकारी स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता की समस्या बनी हुई है।
मार्च 2027 तक सेवानिवृत्ति और पदोन्नति का हिसाब
शिक्षकों की कमी और प्रस्तावित भर्ती के सवाल पर सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों तथा पदोन्नति के बाद उपलब्ध होने वाले पदों की गणना की जा रही है। इसके बाद भर्ती में पदों की संख्या बढ़ सकती है। प्रदेश में वर्तमान में 2 लाख 46 हजार 976 स्थायी शिक्षक और 66,386 अतिथि शिक्षक कार्यरत बताए गए हैं। ऐसे में रिक्तियों, सेवानिवृत्ति और पदोन्नति के बाद बनने वाले पदों की गणना पूरी होने के बाद भर्ती का वास्तविक आकार क्या होगा, इस पर भी नजर है।
66 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक भी असमंजस में
इस पूरे विवाद का दूसरा बड़ा पक्ष अतिथि शिक्षक हैं। प्रदेश में 66 हजार से अधिक अतिथि शिक्षक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के सामने स्थायी नियुक्ति की स्पष्ट राह का सवाल बना हुआ है। नई भर्ती और पात्रता परीक्षा की प्रक्रियाओं के बीच उनका रोजगार भी अनिश्चितता से घिरा हुआ है।
इस तरह शिक्षक भर्ती का संकट नए अभ्यर्थियों से आगे बढ़कर लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के भविष्य से भी जुड़ गया है। चयनित शिक्षकों के आंदोलन को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का समर्थन भी मिल चुका है। वे दो बार धरना स्थल पर पहुंचे थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

