सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब

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सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब


सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब


सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब


सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब


सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ मध्य प्रदेश, बारिश के बीच उमड़ा आस्था का सैलाब


-भोजेश्वर महादेव का 6 क्विंटल फूलों से श्रृंगार, बांदकपुर में सुबह 10 बजे तक 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे

भाेपाल, 10 अगस्त (हि.स.)। श्रावण मास के दूसरे सोमवार को पूरा मध्य प्रदेश भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। राजधानी भाेपाल समेत प्रदेश के प्रमुख शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। कई स्थानों पर बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार, महाआरती और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा। प्रमुख शिवालयों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे।

रायसेन के भोजपुर स्थित विश्वप्रसिद्ध भोजेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का करीब 6 क्विंटल फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। वहीं दमोह के जागेश्वर धाम बांदकपुर में सुबह 10 बजे तक 20 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे और शाम तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सुबह करीब 4 बजे से दर्शन के लिए कतारें लग गईं। जबलपुर में प्रदेश की प्रमुख 33 किलोमीटर लंबी संस्कार कांवड़ यात्रा गौरीघाट से कैलाशधाम के लिए रवाना हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

भोजेश्वर महादेव का 6 क्विंटल फूलों से श्रृंगार

रायसेन जिले के भोजपुर स्थित भोजेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार आकर्षण का केंद्र रहा। विशाल शिवलिंग को करीब 6 क्विंटल फूलों से सजाया गया। फूलों से भगवान भोजेश्वर का श्रृंगार त्रिशूल और डमरू के स्वरूप में किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के महंत पवन गिरि महाराज ने भगवान भोजेश्वर का रुद्रमहाभिषेक किया। इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती हुई। रुद्रमहाभिषेक के दौरान विश्व कल्याण, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई। बारिश के बावजूद सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

सोमेश्वर धाम में गेट बंद, पाइप से किया जलाभिषेक

रायसेन किले की पहाड़ी पर स्थित सोमेश्वर धाम में भी बारिश के बीच श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची। सुबह 6 बजे से ही भक्तों का आना शुरू हो गया था। मंदिर में दर्शन और अभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में गहरी आस्था दिखाई दी। गेट बंद रहने के कारण कुछ श्रद्धालुओं ने पाइप के जरिए भगवान शिव का अभिषेक किया। बारिश के जल चढ़ाते श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारे लगाते रहे। श्रद्धालुओं ने सोमेश्वर धाम तक भक्ति यात्रा भी निकाली और भगवान शिव से सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना की।

जबलपुर में 33 किमी की संस्कार कांवड़ यात्रा

जबलपुर में साेमवार काे प्रदेश की प्रमुख संस्कार कांवड़ यात्रा का 16वां आयोजन किया जा रहा है। गौरीघाट से खमरिया स्थित कैलाशधाम तक करीब 33 किलोमीटर की यात्रा सुबह 6 बजे शुरू हुई। आयोजकों ने एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई है। यात्रा में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भी यात्रा में शामिल होने का कार्यक्रम है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के भी इसमें शामिल होने की जानकारी है। कांवड़ यात्रा के मार्ग पर 300 से अधिक सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पंडाल लगाए हैं। जगह-जगह फूलों से कांवड़ियों का स्वागत किया जा रहा है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 24 से अधिक थाना क्षेत्रों का पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन किया गया है। भीड़ के मद्देनजर शहर के सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश रखा गया है।

एक संकल्प-एक पौधा की परंपरा

संस्कार कांवड़ यात्रा की खासियत इसका पर्यावरण संदेश भी है। श्रद्धालु नर्मदा जल के साथ पौधा लेकर चलते हैं और कैलाशधाम की पहाड़ियों में उसका रोपण करते हैं। आयोजकों के अनुसार इस पहल से कैलाशधाम क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है। यात्रा गौरीघाट से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कैलाशधाम पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु भगवान शिव का नर्मदा जल से अभिषेक करेंगे। यह यात्रा गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुकी है।

बांदकपुर में सुबह 10 बजे तक 20 हजार से ज्यादा दर्शन

दमोह के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम बांदकपुर में सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। मंदिर के पट सुबह 4 बजे खुलते ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। सुबह 10 बजे तक 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई है। भक्तों ने भगवान जागेश्वर नाथ को जल अर्पित किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग की गई और मुख्य गेट के साथ पीछे के गेट से भी श्रद्धालुओं की आवाजाही कराई गई।

सुरक्षा के लिए करीब छह थाना क्षेत्रों का पुलिस बल तैनात रहा। मंदिर परिसर में 60 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। मेडिकल टीम भी तैनात रही। मंदिर प्रबंधन के अनुसार शाम तक श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख से अधिक पहुंचने का अनुमान है। दमोह के अलावा जबलपुर के तिलवारा घाट से करीब 100 कांवड़ियों का जत्था भी जागेश्वर धाम पहुंचा और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

ओंकारेश्वर में तड़के से कतारें, बारिश में भी बोल बम

खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सावन के दूसरे सोमवार पर आस्था का सैलाब देखने को मिला। रिमझिम बारिश के बीच भी बाबा ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु लगातार पहुंचते रहे। सुबह करीब 4 बजे से ही दर्शन मार्ग पर लंबी कतारें लग गई थीं। ज्योतिर्लिंग का महाशृंगार और महाभोग के बाद दर्शन शुरू हुए। मंदिर परिसर और नर्मदा घाट हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजते रहे। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचे। बारिश के बीच दर्शन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

ग्वालियर में कोटेश्वर महादेव के बाहर लंबी कतार

ग्वालियर में भी सावन के दूसरे सोमवार पर प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। प्राचीन कोटेश्वर महादेव मंदिर में तड़के से भक्तों की कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक किया। कोटेश्वर महादेव मंदिर को ग्वालियर के प्रमुख प्राचीन धार्मिक स्थलों में माना जाता है। इसका संबंध सिंधिया राजवंश से भी बताया जाता है। सावन में ग्वालियर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

भिंड में वनखंडेश्वर के बाहर रात से लगी कतार

भिंड के प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना रविवार रात से ही शुरू हो गया था। सोमवार तड़के 4 बजे तक मंदिर के बाहर लंबी कतार लग गई। मंदिर समिति और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराए। कुंडेश्वर महादेव मंदिर में पार्थिव शिवलिंग निर्माण विशेष आकर्षण रहा। महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और बच्चों ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाए और उनका विधि-विधान से पूजन किया। रुद्र मंत्र, पंचाक्षरी मंत्र और ओम नम: शिवाय के सामूहिक जाप से मंदिर परिसर गूंजता रहा। गौरी सरोवर किनारे स्थित महाकालेश्वर महादेव और अटेर के प्राचीन बौरेश्वर महादेव मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।

सिवनी में स्फटिक शिवलिंग का विशेष पूजन

सिवनी के गुरु धाम दिघोरी में स्थापित विशाल प्राकृतिक स्फटिक शिवलिंग पर सावन सोमवार के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसे एशिया के सबसे बड़े प्राकृतिक स्फटिक शिवलिंग के रूप में जाना जाता है। फरवरी 2002 में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज द्वारा इसकी स्थापना किए जाने की जानकारी है। सावन के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन और अभिषेक के लिए पहुंचते हैं। भक्तों ने जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव की आराधना की।

पचमढ़ी के चौरागढ़ में त्रिशूल लेकर पहुंचे कांवड़िए

नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी स्थित चौरागढ़ मंदिर में भी शिवभक्तों की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालु त्रिशूल लेकर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ चौरागढ़ की ओर बढ़ते दिखाई दिए। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने चौरागढ़ में त्रिशूल का पूजन किया। कई भक्त पूजन के बाद त्रिशूल अपने गांव ले जाकर वहां मंदिर में स्थापित कर सालभर पूजा करने की परंपरा निभाते हैं।

उमरिया के सागरेश्वर मंदिर में विशेष श्रृंगार

उमरिया जिले के सागरेश्वर महादेव मंदिर में सावन सोमवार पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक के साथ बेलपत्र, धतूरा, आक और पुष्प अर्पित किए। मंदिर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही।

श्योपुर में 70 किमी की डाक कांवड़ चार घंटे में पूरी

श्योपुर में 70 से अधिक युवाओं ने अनूठी डाक कांवड़ यात्रा निकाली। श्रद्धालु राजस्थान के कमलेश्वर महादेव मंदिर से पवित्र जल लेकर सोमवार सुबह करीब 5.30 बजे रवाना हुए। युवाओं ने करीब 70 किलोमीटर की दूरी लगभग चार घंटे में दौड़ते हुए पूरी की और श्योपुर के सोईकलां स्थित मुख्य बस स्टैंड के महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया।

टीकमगढ़ के कुंडेश्वर में शाम को विशेष श्रृंगार और महाआरती

टीकमगढ़ के प्रसिद्ध कुंडेश्वर धाम में सुबह 4 बजे पुजारियों ने भगवान शिव का अभिषेक किया। श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में दर्शन का क्रम शाम 4 बजे तक जारी रहने के बाद भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। शाम 7 बजे महाआरती का आयोजन होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

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