उज्जैनः रामसेतु से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारतीय प्रभाव पर विद्वानों का विश्लेषण

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उज्जैनः रामसेतु से दक्षिण-पूर्व एशिया तक भारतीय प्रभाव पर विद्वानों का विश्लेषण


उज्जैन, 27 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में विक्रम महोत्सव अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी इतिहास समागम के दूसरे दिन शुक्रवार को पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल,कालिदास संस्कृत अकादमी परिसर में तीन शैक्षणिक सत्र आयोजित हुए। इनमें राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहास के पुरातात्विक साक्ष्यों पर हुई शोधपूर्ण चर्चा हुईं।

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति संचालनालयए द्वारा अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के सहयोग एवं संयोजन में आयोजित इस संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र की अध्यक्षता वडनगर, गुजरात के डॉ.रमेश चतुर्वेदी ने की। डॉ.विश्वजीत सिंह परमार,डा.रंजना शर्मा और डॉ.अंशु भारद्वाज ने रामसेतु के माध्यम से प्राचीन सीलोन तक भगवान श्रीराम के पहुंचने संबंधी उल्लेखों का विश्लेषण किया। इंडोनेशिया, सुमात्रा और मलय क्षेत्रों में भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित किया। इस सत्र में डॉ. नरेंद्र सिंह पंवार रतलाम, अभिषेक शर्मा,दीपेंद्र सिंह चौधरी, खुशी चौहान, परम वशिष्ठ, प्रो.राजेंद्र सिंह सोलंकी ने शोध पत्रों का वाचन किया। संचालन डॉ.नीता जाधव ने तथा आभार डॉ.रंजना सिंह गौर ने माना।

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता शा. महाविद्यालय, कायथा के प्राध्यापक डा.मुकेश शाह ने की। अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय, बनारस के डा.अजय सिंह एवं डॉ.सतीश दवे थे। सत्र में रश्मि राज वमा,डॉ.नीलम बघेल और डा.मिताली भट्टाचार्य ने कालीघाट के दक्षिणेश्वर मंदिर पर, डॉ.अर्पिता गोदिया ने मुनव्वर क्षेत्र पर भारतीय संस्कृति के प्रभाव,अनीता चौधरी ने जापान में भारतीय संस्कृति के प्रभाव पर तथा निशिता बलुनिया ने अफगानिस्तान में बुद्ध एवं अन्य मूर्तियों के आधार पर बौद्ध संस्कृति के प्रसार पर शोधपत्र प्रस्तुत किए। दीपक सिसोदिया ने वृहत्तर भारत में भारत उत्कर्ष,शैलजा ने नाथ संप्रदाय एवं गुरु गोरखनाथ,नेपाल संदर्भ तथा अपने शोध प्रस्तुत किए। संचालन डॉ.रितेश लौट ने एवं आभार डॉ.राजेंद्र सोलंकी ने माना।

तृतीय सत्र की अध्यक्षता डॉ.प्रीति पाण्डेय ने की। विशेष अतिथि संस्कृत विभाग,वाराणसी के विभागाध्यक्ष डॉ.अभिमन्यु थे। सत्र में प्रांजल ने तक्षशिला की विरासत पर,ऋचा अग्रवाल ने वृहत्तर भारत के निर्माण में धर्म और अर्थ की भूमिका पर,पार्थ अग्रवाल ने भारत उत्कर्ष पर तथा दीपक सोलंकी ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म के विस्तार पर विचार रखे। संचालन डॉ.महेंद्र पांडे ने एवं आभार डा.अजय शर्मा ने माना।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल

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