जबलपुरः आरटीओ के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा की टेंपरेरी बेल पर फैसला सुरक्षित
जबलपुर, 10 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बुधवार को बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की 60 दिन की अस्थायी जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
नियमित जमानत याचिका पहले ही जिला अदालत और हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है, ऐसे में इस बार सौरभ शर्मा ने पत्नी दिव्या तिवारी की प्रस्तावित सर्जरी, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और दो नाबालिग बच्चों की देखभाल को आधार बनाकर राहत मांगी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि जमानत मामलों में शीघ्र निर्णय संबंधी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के कारण इस याचिका पर जल्द आदेश आ सकता है।
जांच एजेंसियों के अनुसार लगभग 28 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले एक परिवहन आरक्षक ने कथित तौर पर 108.24 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियां अर्जित कीं, जिनमें नकदी, सोना, अचल संपत्तियां और विभिन्न निवेश शामिल हैं। ईडी पहले ही अदालत को बता चुकी है कि मामले में बड़ी मात्रा में संपत्तियां जब्त, फ्रीज और अटैच की जा चुकी हैं।
जांच के दौरान जिन रिश्तेदारों, परिजनों और सहयोगियों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां, कंपनियां और निवेश सामने आए थे, उनमें से लगभग सभी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष यह कहकर खुद को अलग कर लिया कि वास्तविक नियंत्रण और निर्णय सौरभ शर्मा ही लेते थे। पत्नी दिव्या तिवारी ने अपने बयान में कहा कि वह कई कंपनियों में डायरेक्टर जरूर थीं, लेकिन कारोबार और निवेश की जानकारी नहीं थी तथा केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करती थीं।
सौरभ शर्मा के बचपन के मित्र और कथित कारोबारी साझेदार चेतन सिंह गौर ने ईडी को दिए बयान में कहा कि उसके नाम पर मौजूद कंपनियों और संपत्तियों का वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा था। चेतन ने यहां तक दावा किया कि उसके घर से बरामद नकदी, सोना-चांदी और चर्चित इनोवा वाहन में मिला 51 किलो सोना तथा 11.60 करोड़ रुपये नकद भी सौरभ शर्मा से जुड़े थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

