सतना नगर निगम में नामकरण के प्रस्तावों पर हंगामा, ‘दीनदयाल अमर रहें’ और ‘सहस्रबाहु की जय’ के लगे नारे

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सतना नगर निगम में नामकरण के प्रस्तावों पर हंगामा, ‘दीनदयाल अमर रहें’ और ‘सहस्रबाहु की जय’ के लगे नारे


सतना, 28 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम परिषद के बुधवार को आयोजित सामान्य सम्मिलन में विकास कार्यों के बजाय सार्वजनिक स्थलों के नामकरण के प्रस्तावों पर जमकर बहस हुई। सड़क, तालाब, मोहल्लों, गलियों और चौराहों के नाम बदलने को लेकर पार्षद आमने-सामने आ गए। पीएम आवास चौराहा उतैली के नामकरण पर विवाद इतना बढ़ा कि सदन में नारेबाजी होने लगी। वहीं, धवारी स्टेडियम के नामकरण पर सहमति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव को अंतिम निर्णय तक स्थगित रखना पड़ा।

बैठक में पहुंचे विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने नामकरण के प्रस्तावों पर चल रही बहस के बीच नगर निगम की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए काउंटर हैं, तो नामकरण के लिए भी एक काउंटर खोल दिया जाए। उन्होंने कहा कि शहर की प्राथमिकता नामकरण नहीं, बल्कि सड़क, पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए।

परिषद की बैठक में बम्हगवां के मोहल्लों और गलियों के नामकरण को लेकर नेता प्रतिपक्ष, पार्षद आशु तिवारी और पंकज के बीच बहस हुई। रानी बालकृष्ण शुक्ला की ओर से पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी के नाम पर सामुदायिक भवन का नाम रखने का प्रस्ताव रखा गया। इस पर भाजपा पार्षदों की चुप्पी चर्चा का विषय बनी रही। कांग्रेस पार्षदों ने सुझाव दिया कि शंकरलाल तिवारी के नाम पर चौराहे का नाम रखा जाए और उनकी प्रतिमा स्थापित की जाए। महापौर ने कहा कि शंकरलाल तिवारी के परिवार की इस संबंध में सहमति नहीं है।

पीएम आवास चौराहा उतैली का नाम सहस्रबाहु के नाम पर रखने के प्रस्ताव का एल्डरमैन ने विरोध किया। इसके विकल्प के रूप में सौरभ नायक ने दीनदयाल पुरम नाम रखने का सुझाव दिया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष पंकज कुशवाहा और एल्डरमैन के बीच तीखी बहस हुई। सदन में ‘दीनदयाल अमर रहें’ और ‘सहस्रबाहु की जय’ के नारे लगाए गए।

इस दौरान यह सवाल भी उठा कि पूर्वजों द्वारा दान की गई जमीन और गांव के विकास जैसे मुद्दों पर टकराव के बजाय आपसी सहमति से निर्णय लिया जाना चाहिए। पार्षद मीना माधव ने बैठक में पार्षद प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महापौर ममता पांडेय के कार्यकाल में ऐसे लोगों को बैठक से बाहर कर दिया जाता था। इस मुद्दे पर भी सदन में बहस हुई।

धवारी स्टेडियम के नामकरण को लेकर भी सहमति नहीं बन सकी। महापौर परिषद (एमआईसी) की ओर से स्टेडियम का नाम स्वर्गीय शंकर प्रसाद ताम्रकार के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा गया, जबकि विपक्ष स्वर्गीय अर्जुन सिंह के नाम पर अड़ा रहा। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव को अंतिम निर्णय तक होल्ड कर दिया गया।

बैठक के एजेंडे में विभिन्न तालाबों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण से जुड़े अन्य प्रस्ताव भी शामिल थे। इन पर चर्चा के दौरान शहर की बुनियादी जरूरतों और विकास की प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठे।

नगर निगम की बैठक में ट्रेड लाइसेंस शुल्क की दरों में बदलाव का मुद्दा भी सामने आया। एजेंडे में मोबाइल शॉप, जिम, शोरूम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, दुकानों और अन्य कारोबारों के लाइसेंस शुल्क में वृद्धि के प्रस्ताव शामिल थे। विभिन्न व्यवसायों के लिए प्रस्तावित दरों में कई गुना तक बढ़ोतरी दिखाई गई। इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका के बीच यह मुद्दा भी चर्चा में रहा।

विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा का नगर निगम परिषद की बैठक में पहुंचना भी चर्चा का प्रमुख विषय रहा। वे आमतौर पर परिषद की बैठकों में शामिल नहीं होते हैं। पिछले दिनों महापौर योगेश ताम्रकार ने सोशल मीडिया पर उन पर सतना के विकास की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद बुधवार को विधायक सदन में पहुंचे और करीब 20 मिनट तक शहर के विकास से जुड़े मुद्दे उठाए।

विधायक ने नगर निगम और महापौर के साथ हुए पत्राचार से संबंधित करीब 50 पत्र सदन के पटल पर रखे। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार से हजारों करोड़ रुपये मिलने और नगर निगम का सालाना टर्नओवर करीब 500 करोड़ रुपये होने के बावजूद शहर में चलने लायक सड़कें तक नहीं हैं।

कुशवाहा ने कहा कि नगर निगम की प्राथमिकता नामकरण के बजाय सड़क, पेयजल और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए। विकास के मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर चर्चा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सतना के विकास के लिए जहां जरूरत पड़ेगी, वह शहर से लेकर भोपाल और दिल्ली तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

बैठक में विधायक की सक्रियता के साथ उनके पिछले पांच साल के कार्यकाल और वर्तमान कार्यकाल में शहर की समस्याओं को लेकर अब सदन में मुखर होने पर भी सवाल उठे। शहर की सड़कें, पेयजल, सफाई और आधारभूत ढांचे से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से चर्चा में रही हैं।

ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सदन में उठाए गए सवालों के आधार पर कितनी ठोस कार्रवाई होती है और शहर के विकास से जुड़े मुद्दे किस गति से आगे बढ़ते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी

Livevns.news Desk
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